एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) में बेतहाशा बढ़ोत्तरी
भारत में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें पहली बार ₹2,07,341.22 प्रति किलोलीटर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई हैं, जो कि 1 अप्रैल तक दिल्ली में दर्ज की गई। यह पिछले महीने की तुलना में 114.5% की भारी वृद्धि है। 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में दोगुने से अधिक का उछाल आया है, जिसने ATF की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। एयरलाइंस के लिए, ईंधन उनकी कुल लागत का 30-40% होता है, इसलिए यह वृद्धि एक बड़ा वित्तीय झटका है। यह कीमतें 2022 में ₹1.1 लाख प्रति किलोलीटर के पिछले शिखर से काफी ऊपर हैं। इस तरह की तेज फ्यूल लागत वृद्धि, स्थिर उच्च कीमतों की तुलना में एयरलाइंस के लिए रणनीति समायोजित करने का बहुत कम समय छोड़ती है।
संकट में एयरलाइंस और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
ATF की कीमतों में नाटकीय उछाल ने एयरलाइन कंपनियों के मुनाफे पर भारी दबाव डाल दिया है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने भारतीय विमानन उद्योग के लिए अपने दृष्टिकोण को 'स्थिर' से बदलकर 'नकारात्मक' कर दिया है। एजेंसी का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 में उद्योग को ₹17,000-₹18,000 करोड़ का शुद्ध घाटा हो सकता है। यह माहौल विभिन्न एयरलाइंस के बीच वित्तीय मजबूती के अंतर को स्पष्ट रूप से दिखाता है। बाजार में करीब 62-65% हिस्सेदारी के साथ अग्रणी इंडिगो (IndiGo), अपने कुशल संचालन और एक समान फ्लीट के कारण वित्तीय मजबूती रखती है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स रेश्यो 34.43 और 52.96 के बीच है। इंडिगो की 30-45 दिनों की बुकिंग साइकिल कंपनी को कुछ लागत ग्राहकों पर डालने में मदद करती है। हालांकि, जो एयरलाइन फ्यूल की कीमतों को हेज (hedge) नहीं करती है, वह भी निकट भविष्य में मुनाफे के दबाव का सामना करने की उम्मीद है। मूडीज रेटिंग्स (Moody's Ratings) के अनुसार, इंडिगो को भले ही थोड़े समय के लिए मुनाफे में चुनौती का सामना करना पड़े, लेकिन वह संकट से निपटने में अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
इसके विपरीत, स्पाइसजेट (SpiceJet) जैसी कंपनियां गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं। स्पाइसजेट की नाजुक वित्तीय स्थिति, उसके सीमित फ्यूल हेजिंग (लगभग 15%) और वित्तीय समस्याओं के इतिहास के कारण और खराब हो गई है। इसका स्टॉक 2026 में अब तक 56.15% गिर चुका है, जो इसकी कमजोरी को दर्शाता है। एयर इंडिया ग्रुप (Air India Group) ने भी बड़े घाटे की सूचना दी है, जिसमें फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए ₹9,568.4 करोड़ का प्री-टैक्स लॉस और फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए कम से कम ₹15,000 करोड़ के रिकॉर्ड घाटे की उम्मीद है। सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण फरवरी 2026 तक करीब 13-15% फ्लीट ग्राउंडेड है, जो कुल मिलाकर क्षेत्र के लिए चुनौतियां बढ़ा रहा है।
किराए में बढ़ोत्तरी और उद्योग की चुनौतियां
बढ़ती लागतों को पूरा करने के लिए, भारतीय एयरलाइंस यात्रियों पर इसका कुछ बोझ डाल रही हैं। एयरलाइंस ने पहले ही टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है या नया लागू कर दिया है। डोमेस्टिक किराए में 5-10% तक की वृद्धि हो सकती है। 23 मार्च 2026 को डोमेस्टिक एयरफेयर कैप्स (airfare caps) को हटाने से बाजार-संचालित मूल्य निर्धारण की अनुमति मिली है, जो अब ईंधन की लागत से काफी प्रभावित है। सरकार ने राज्यों से ATF पर वैट (VAT) कम करने का आग्रह किया है ताकि कुछ राहत मिल सके, और वैश्विक मूल्य अस्थिरता के प्रभाव को कम करने के लिए चर्चाएं जारी हैं। हालांकि, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का अवमूल्यन एयरलाइंस की परेशानी को और बढ़ाता है, क्योंकि विमान लीज और रखरखाव जैसी डॉलर में भुगतान की जाने वाली लागतें बढ़ जाती हैं। IATA जैसी वैश्विक विमानन संस्थाएं 2026 में $41 बिलियन के वैश्विक उद्योग लाभ और 3.9% के नेट मार्जिन का अनुमान लगा रही हैं। हालांकि, ईंधन लागत में स्थिरता एक महत्वपूर्ण कारक है। वर्तमान ईंधन मूल्य वृद्धि की अप्रत्याशित प्रकृति, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख पारगमन मार्गों में व्यवधान के साथ मिलकर, महत्वपूर्ण अनिश्चितता पैदा करती है और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव डालती है।
संरचनात्मक कमजोरियां और अनपेक्षित जोखिम
वर्तमान संकट भारतीय विमानन क्षेत्र की भेद्यता को उजागर करता है। कई यूरोपीय वाहकों के विपरीत जो ईंधन मूल्य अस्थिरता के खिलाफ सक्रिय रूप से हेज करते हैं, भारतीय एयरलाइंस के पास अक्सर ऐसी रणनीतियों के लिए कम वित्तीय गुंजाइश होती है, जिससे वे तेजी से मूल्य में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। स्पाइसजेट की न्यूनतम हेजिंग इसकी पहले से ही गंभीर वित्तीय स्थिति को और खराब कर रही है। ईंधन लागत से परे, एयरलाइंस को अन्य परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें विमान अपडेट को प्रभावित करने वाली चल रही सप्लाई चेन बाधाएं और विमानों की बढ़ती औसत आयु शामिल है। इसके अलावा, गंभीर सुरक्षा मुद्दे बने हुए हैं, 2026 के लिए किसी भी भारतीय एयरलाइन को शीर्ष वैश्विक सुरक्षित सूची में शामिल नहीं किया गया है। एयर इंडिया का सुरक्षा रिकॉर्ड विशेष रूप से चिंता का विषय रहा है, जिसमें जुलाई 2025 के ऑडिट में 51 खामियां पाई गईं। उद्योग में किंगफिशर एयरलाइंस (Kingfisher Airlines) और जेट एयरवेज (Jet Airways) जैसी हाई-प्रोफाइल विफलताओं का इतिहास, उच्च ऋण और अप्रत्याशित ऑपरेटिंग वातावरण से जुड़े जोखिमों के बारे में एक स्पष्ट चेतावनी देता है। जबकि 60 दिनों के लिए ATF आपूर्ति सुरक्षित करने जैसे सरकारी उपाय अल्पावधि में राहत प्रदान करते हैं, क्षेत्र के लिए प्रमुख संरचनात्मक परिवर्तनों के बिना आगे का रास्ता अनिश्चित बना हुआ है।