दिल्ली का Mobility Hub प्रेशर में
दिल्ली की भागदौड़ भरी सड़कों पर Rapido का दबदबा कायम है। कंपनी हर महीने लगभग 3 करोड़ Rides पूरी करवाती है। पिछले 6 महीनों में ही 6.5 लाख नए ड्राइवर्स को प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। यह दिखाता है कि दिल्ली जैसे बड़े शहर Rapido के लिए कितने अहम हैं, जहाँ कंपनी देश भर में 30 लाख से ज़्यादा ड्राइवर्स को 400+ शहरों में रोज़गार देती है। Rapido का वैल्यूएशन सितंबर 2024 में $1.1 बिलियन तक पहुँच चुका है और FY24 में कंपनी का रेवेन्यू ₹648 करोड़ रहा।
बदलता Competition का मैदान
Rapido ने खास तौर पर बाइक टैक्सी और ऑटो-रिक्शा पर फोकस करके Uber और Ola जैसे बड़े नामों को सीधी टक्कर दी है। जुलाई 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, Rapido के मंथली एक्टिव Android यूजर्स Uber से ज़्यादा, यानी करीब 50 मिलियन हो गए हैं, जबकि Uber के 30 मिलियन थे। फोर-व्हीलर कैब मार्केट में Uber का दबदबा अभी भी 50% के आसपास है, लेकिन Rapido ने यहाँ भी करीब 30% मार्केट शेयर हासिल कर लिया है। इस वजह से Uber को अपने किराए कम करने और ड्राइवर्स के लिए सब्सक्रिप्शन मॉडल लाने पर विचार करना पड़ रहा है।
इस रेस में अब भारत टैक्सी (Bharat Taxi) जैसा नया खिलाड़ी भी उतर गया है। फरवरी 2026 में लॉन्च हुआ यह प्लेटफॉर्म 'ड्राइवर ही मालिक' मॉडल पर काम करता है। यह ड्राइवर्स से जीरो कमीशन लेता है, किराए कम रखता है और ड्राइवर्स को ज़्यादा फायदे देता है। यह मॉडल Rapido और उसके प्रतिद्वंद्वियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
ड्राइवर की नाराज़गी और रेगुलेटरी बादल
Rapido जैसे प्लेटफॉर्म्स की ऑपरेशनल सफलता पर अब ड्राइवर्स का असंतोष और रेगुलेटरी जांच की काली छाया मंडराने लगी है। 7 फरवरी 2026 को 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' नाम से एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल हुई, जिसने दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में सेवाएं ठप कर दीं। ड्राइवर्स 'मनमानी किराया नीतियों', कम कमाई और रेगुलेटरी निगरानी की कमी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वे सरकार से न्यूनतम बेस किराया तय करने की मांग कर रहे हैं।
तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन का कहना है कि ड्राइवर्स 'असुरक्षा, शोषण और अस्थिर काम करने की स्थिति' का सामना कर रहे हैं, और करीब 40% गिग वर्कर्स महीने में ₹15,000 से भी कम कमा पाते हैं। वर्कर्स को 'इंडिपेंडेंट कॉन्ट्रैक्टर' मानना, गैर-व्यावसायिक वाहनों का इस्तेमाल और 'मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2025' जैसे नियमों का सही से पालन न होना, इस गुस्से की बड़ी वजहें हैं। साथ ही, हर राइड पर लगने वाले 5% जीएसटी को भी ड्राइवर्स की कमाई कम होने का एक कारण बताया जा रहा है।
विश्लेषणात्मक जोखिम
दिल्ली में Rapido के मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, कई बड़े जोखिम मंडरा रहे हैं। आक्रामक विस्तार की वजह से कंपनी का घाटा बढ़ रहा है और भारी कैश बर्न हो रहा है। FY25 में ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू $1.25 बिलियन तक पहुँचने के बावजूद, कंपनी पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। Competition सिर्फ़ Uber और Ola से ही नहीं, बल्कि Bharat Taxi जैसे नए मॉडलों से भी बढ़ रही है। हाल ही में Rapido पर भ्रामक विज्ञापन के लिए लगा जुर्माना भी कंपनी की प्रतिष्ठा के लिए जोखिम खड़ा करता है।
लगातार हो रहे ड्राइवर प्रोटेस्ट, न्यूनतम किराया, काम करने की स्थिति और रेगुलेटरी स्पष्टता को लेकर होने वाली मांगें, Rapido के ऑपरेशन्स और उसकी इमेज के लिए एक बड़ा खतरा हैं। गिग वर्कर्स के वर्गीकरण को लेकर अनिश्चितता और सोशल सिक्योरिटी की कमी, ऐसी कमजोरियां हैं जो लगातार हड़तालों और सेवा में बाधा का कारण बन सकती हैं। हालांकि Rapido का कहना है कि दिल्ली के ड्राइवर्स हर महीने ₹20,000 से ₹40,000 तक कमा सकते हैं, पर हड़तालें बताती हैं कि खर्च और कमीशन के बाद कई लोगों के लिए यह कमाई पर्याप्त नहीं है।
आगे का रास्ता: मुश्किलों से पार पाना
Rapido का दिल्ली में मल्टी-मोडल अप्रोच के साथ आक्रामक विस्तार इसे भारतीय मोबिलिटी सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी बनाता है। लेकिन, कंपनी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह बढ़ती Competition और गिग इकोनॉमी के व्यवस्थागत मुद्दों से कैसे निपटती है। कंपनी ने हाल ही में फ़ूड डिलीवरी में भी कदम रखा है, ताकि कमाई के नए रास्ते खोले जा सकें। भारतीय मोबिलिटी सेक्टर 2030 तक $600 बिलियन से ज़्यादा का होने का अनुमान है, जो कंपनियों के लिए बड़ा अवसर है, बशर्ते वे तेज़ ग्रोथ के साथ ड्राइवर संतुष्टि और रेगुलेटरी अनुपालन को भी साध सकें। नए मॉडलों की सफलता और ड्राइवर एक्टिविज्म यह संकेत दे रहा है कि एग्रीगेटर के बेलगाम दबदबे का दौर अब एक बड़ी परीक्षा का सामना कर रहा है।