बेंगलुरु में Rapido कैब इस्तेमाल करने वाली एक महिला यात्री ने सुरक्षा खतरे और ड्राइवर की पहचान गलत होने का आरोप लगाया है। भले ही Rapido एक प्राइवेट कंपनी है, ऐसे मामले कंपनी के ऑपरेशनल रिस्क को उजागर करते हैं, जो 2026 के अंत तक संभावित IPO के लिए अहम हैं।
राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म Rapido एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बेंगलुरु में एक यात्री ने कंपनी की सेवा का उपयोग करते समय सुरक्षा खतरे और ड्राइवर की पहचान में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
यात्री के अनुसार, ऐप में आई एक तकनीकी खराबी के कारण गलत डेस्टिनेशन (destination) दर्ज हो गया, जिसके बाद किराए को लेकर बहस हो गई। सबसे गंभीर बात यह है कि यात्री ने दावा किया कि जो ड्राइवर उसे पिक-अप करने आया था, वह प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड व्यक्ति नहीं था। इस घटना ने कंपनी के वेरिफिकेशन और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Rapido का एक्शन
इस घटना के तुरंत बाद, Rapido ने उस ड्राइवर को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है और माफी भी मांगी है। कंपनी ने कहा है कि वह इस मामले की जांच कर रही है, जिसमें यात्री द्वारा बताई गई तकनीकी समस्या और ड्राइवर की पहचान में हुई गड़बड़ी, दोनों शामिल हैं।
IPO की राह में रोड़ा?
यह घटना न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है, बल्कि Rapido के भविष्य के लिए भी बड़े मायने रखती है। Rapido फिलहाल एक प्राइवेट कंपनी है और कंपनी 2026 के अंत तक अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने की तैयारी कर रही है। राइड-हेलिंग सेक्टर की कंपनियों के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि वे सुरक्षा मानकों और ड्राइवर वेरिफिकेशन को लेकर सख्त रहें।
वित्तीय स्थिति पर भी असर?
फाइनेंशियल ईयर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, Rapido ने लगभग ₹1,003 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, वहीं अपने नेट लॉस को ₹258 करोड़ तक सीमित रखने की कोशिश की है। पब्लिक लिस्टिंग की ओर बढ़ते हुए, कंपनी के लिए यह ज़रूरी होगा कि वह ऑपरेशनल रिस्क, जैसे ड्राइवर का गलत व्यवहार, सुरक्षा में चूक और ऐप की स्थिरता, को प्रभावी ढंग से मैनेज करे। सुरक्षा से जुड़ी ऐसी लगातार खबरें रेगुलेटर्स (regulators) का ध्यान खींच सकती हैं और कंपनी की विस्तार योजनाओं या IPO की तैयारी में बाधा डाल सकती हैं।
