जम्मू और कश्मीर के राजौरी में एक 17 वर्षीय किशोरी की एम्बुलेंस कीचड़ में फंसी सड़क पर तीन घंटे तक फंसी रहने के कारण मौत हो गई। इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने एक असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया है। यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) का हिस्सा थी, जिसे भूस्खलन के बावजूद चालू घोषित कर दिया गया था।
क्या हुआ राजौरी में?
जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक 17 वर्षीय किशोरी की जान चली गई। उसकी एम्बुलेंस चक मेथियानी-पंगलर-कोटेचरवाल सड़क पर गहरे कीचड़ में लगभग तीन घंटे तक फंसी रही, जिससे उसे समय पर मेडिकल सहायता नहीं मिल पाई। यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत आती है और हाल की भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे वाहनों का गुजरना असंभव हो गया था।
लापरवाही की जांच
इस घटना ने ग्रामीण बुनियादी ढांचे के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय अधिकारियों ने पहले इस मार्ग को यातायात के लिए खुला और सुरक्षित घोषित किया था, लेकिन कोतरंका के अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ADC) द्वारा की गई जांच में सड़क की जर्जर हालत सामने आई। जांच में गहरे गड्ढों और लगातार हो रही भू-स्थिरता की समस्याओं का पता चला, जिससे यह रास्ता आपातकालीन वाहनों के लिए खतरनाक हो गया था।
प्रशासनिक कार्रवाई
इस कथित लापरवाही के चलते, राजौरी जिला प्रशासन ने एक औपचारिक जांच शुरू कर दी है। प्रोजेक्ट के लिए जिम्मेदार असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (AEE) को जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, PMGSY डिवीजन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर का वेतन रोकने का भी आदेश दिया गया है, क्योंकि उन्होंने सड़क सुरक्षा और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल का पालन करने में विफलता दिखाई है।
यह घटना पहाड़ी इलाकों में ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े परिचालन जोखिमों को उजागर करती है, जहाँ खराब मौसम सड़कों की स्थिति को तेजी से बिगाड़ सकता है। आपातकालीन सेवाओं के लिए ऐसी जीवन रेखाओं की सटीक और वास्तविक समय रिपोर्टिंग महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन से सात दिनों के भीतर एक विस्तृत जांच रिपोर्ट जारी करने की उम्मीद है, जिससे प्रशासनिक विफलता की सीमा और प्रभावित गांवों के लिए सुरक्षित कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए आवश्यक कदम तय किए जाएंगे।
