Railway Board ने सभी जोन में LHB कोच की सुरक्षा जांच के आदेश दिए हैं। कोच के bogies में बढ़ते जंग और ढांचागत कमजोरी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, जिसके पीछे मुख्य कारण बायो-टॉयलेट लीकेज और केमिकल वॉशिंग जैसे कारक हैं।
जंग के कारण सुरक्षा पर सवाल
Railway Board ने देशभर में दौड़ने वाली सभी LHB (Linke Hofmann Busch) कोचों की तुरंत सुरक्षा जांच के निर्देश जारी किए हैं। कोच के अंडरफ्रेम और bogie के हिस्सों में तेजी से हो रहे कटाव (corrosion) को देखते हुए रेलवे ने इसे एक बड़ी चुनौती माना है। टेक्निकल टीम की रिपोर्ट के अनुसार, समय से पहले कोच के स्ट्रक्चर का कमजोर होना चिंता का विषय है, जिसे सुधारने के लिए कड़े प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं।
क्यों खराब हो रहे कोच?
टेक्निकल असेसमेंट में तीन मुख्य वजहें सामने आई हैं:
- बायो-टॉयलेट लीकेज: एसिडिक एफ्लुएंट्स के रिसाव से फर्श और सपोर्ट बीम को भारी नुकसान हो रहा है।
- तटीय इलाकों का असर: समुद्र के पास चलने वाली ट्रेनों में खारेपन (salinity) के कारण ऑक्सीडेशन की रफ्तार बढ़ गई है।
- केमिकल वॉशिंग: कोच की धुलाई में इस्तेमाल होने वाले आक्रामक रसायनों और विनाइल एडवरटाइजमेंट के नीचे नमी फंसने से जंग तेजी से फैल रही है।
आगे क्या होगा?
रेलवे बोर्ड ने अब कोच की धुलाई में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की निगरानी सख्त कर दी है और ड्रेनेज सिस्टम को क्लियर रखने के आदेश दिए हैं। बोर्ड ने Integral Coach Factory (Chennai), Rail Coach Factory (Kapurthala) और Modern Coach Factory (Rae Bareli) को भविष्य के उत्पादन में इंजीनियरिंग समाधान तलाशने को कहा है।
इस फैसले से रेलवे के मेंटेनेंस कॉस्ट में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। इन्वेस्टर्स और स्टेकहोल्डर्स अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या आगे चलकर एंटी-कोरोशन मटेरियल और नई टेंडर शर्तों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
