पुणे पुलिस ने Google और Apple को पत्र लिखकर Rapido ऐप को उनके स्टोर से हटाने का निर्देश दिया है। कंपनी पर बिना वैध कमर्शियल परमिट के बाइक टैक्सी सेवा चलाने का आरोप है, जिसके बाद प्रशासन ने अब सख्ती बढ़ा दी है।
पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासन ने यह बड़ा कदम उठाया है। पुणे कलेक्टर और रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) के चेयरमैन जितेंद्र डूडी के निर्देश पर पुलिस ने ऐप को डिजिटल स्टोर से ब्लॉक करने की मांग की है। अधिकारियों का साफ कहना है कि राज्य परिवहन विभाग से जरूरी कमर्शियल परमिट न होने के कारण यह बाइक टैक्सी सेवा पूरी तरह से 'अनधिकृत' है। कंपनी के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है, जो अब कानूनी शिकंजे को और मजबूत करती है।
बाइक टैक्सी के सामने कानूनी चुनौतियां
समस्या की जड़ राज्य स्तर पर स्पष्ट गाइडलाइंस का न होना है। हालांकि लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए बाइक टैक्सी की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने अभी तक टू-व्हीलर टैक्सी के लिए कमर्शियल रजिस्ट्रेशन का कोई ठोस ढांचा तैयार नहीं किया है। रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) में कंपनी की परमिट एप्लीकेशन काफी समय से पेंडिंग है, जिससे यह सर्विस एक 'लीगल ग्रे एरिया' में फंसी हुई है।
यूनियन और यात्रियों में खींचतान
इस कार्रवाई ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर में लंबे समय से चल रहे विवाद को और हवा दे दी है। महाराष्ट्र कामगार सभा और इंडियन गिग वर्कर्स फ्रंट जैसी यूनियनें लंबे समय से इस सर्विस का विरोध कर रही हैं। उनका तर्क है कि सुरक्षा और फेयर कम्पटीशन के मानकों का पालन नहीं हो रहा है। वहीं, दूसरी ओर पुणे के आम नागरिक इस सर्विस को सस्ता और ट्रैफिक से निजात पाने का जरिया मानते हैं। मेट्रो और बसों के धीमे विस्तार के कारण यात्री ऐप आधारित इन सेवाओं को अपनी जरूरत बता रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह घटना गिग-इकोनॉमी प्लेटफॉर्म्स के लिए बढ़ते रेगुलेटरी रिस्क को दिखाती है। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि राज्य सरकारें आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट पॉलिसी में क्या बदलाव करती हैं। जब तक स्पष्ट नियम नहीं बनते, इस तरह की कंपनियों को ऑपरेशनल बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
