संसदीय समिति ने भारत के बस ट्रांसपोर्ट सेक्टर में कायापलट के लिए 'One Nation, One Bus Permit' सिस्टम का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव का लक्ष्य राज्य-स्तरीय बाधाओं को खत्म करना और एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल ग्रिड बनाना है।
ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 392वीं रिपोर्ट में भारत के रोड ट्रांसपोर्ट सेक्टर को पूरी तरह से बदलने का ब्लूप्रिंट पेश किया है। समिति का मुख्य प्रस्ताव 'One Nation, One Bus Permit' लागू करना है, ताकि राज्यों के अलग-अलग नियमों के झंझट से मुक्ति मिल सके। वर्तमान में, बॉर्डर पर मौजूद चेक-पोस्ट ऑपरेशंस में काफी देरी और प्रशासनिक लागत बढ़ाते हैं, जिसे खत्म करने पर जोर दिया गया है।
इस रिफॉर्म के मुख्य स्तंभ:
- रेगुलेटरी एकीकरण: VAHAN और FASTag जैसे सिस्टम के जरिए अंतर-राज्यीय आवाजाही को सरल बनाना। गौरतलब है कि देश के कुल बस बेड़े का लगभग 75% हिस्सा प्राइवेट ऑपरेटर्स के पास है।
- नेशनल बस टर्मिनल्स अथॉरिटी: Airports Authority of India की तर्ज पर एक नई संस्था बनाने का सुझाव है, ताकि टर्मिनल इंफ्रास्ट्रक्चर पर किसी एक राज्य का एकाधिकार न रहे और प्राइवेट प्लेयर्स को भी समान मौका मिले।
- डिजिटल ग्रिड: एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो रियल-टाइम ट्रैकिंग और टिकटिंग को एक ही नेटवर्क पर ले आएगा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
अगर यह प्रस्ताव जमीन पर उतरता है, तो ट्रांसपोर्ट सेक्टर में फॉर्मलाइजेशन बढ़ेगा और कंपनियों की परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) में सुधार होगा। समिति ने सड़क बजट का 25% हिस्सा पब्लिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित करने की सिफारिश की है। हालांकि, यह अभी सिर्फ एक सुझाव है, जिसे लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच टैक्स और रेवेन्यू शेयरिंग पर आपसी सहमति जरूरी होगी। निवेशकों को अब सरकार की ओर से आने वाले एग्जीक्यूटिव फैसलों पर नजर रखनी चाहिए।
