Paradip Port Authority ने अपनी क्षमता का लोहा मनवाते हुए पहली बार **16.5 मीटर** ड्राफ्ट वाले 'केपसाइज' (Capesize) जहाज को सफलतापूर्वक बर्थिंग दी है। इस उपलब्धि से स्टील और पावर सेक्टर के लिए कोयले की इंपोर्ट लागत में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद है।
एक बड़ी उपलब्धि
6 सितंबर, 2026 को Paradip Port ने एक मील का पत्थर हासिल किया, जब 'MV Mineral Kwangyang' नामक केपसाइज जहाज को वेस्टर्न डॉक-1 पर सफलतापूर्वक खड़ा किया गया। इस जहाज में ऑस्ट्रेलिया से 152,000 मीट्रिक टन से ज्यादा कुकिंग कोल लदा था। यह पहली बार है जब बंदरगाह ने इतने गहरे ड्राफ्ट वाले जहाज को संभाला है, जो बड़े पैमाने पर औद्योगिक कार्गो के लिए इसकी नई क्षमता को दर्शाता है।
औद्योगिक लॉजिस्टिक्स पर असर
भारतीय स्टील और पावर कंपनियों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। अब तक बड़े जहाजों को बीच समुद्र में कार्गो ट्रांसफर करना पड़ता था, जो काफी महंगा और समय लेने वाला काम था। सीधे डॉकिंग सुविधा मिलने से कंपनियों की लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, जिससे उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन में सुधार हो सकता है और वे ग्लोबल मार्केट में बेहतर मुकाबला कर सकेंगी।
₹2,000 करोड़ का बड़ा निवेश
इस सफलता के पीछे सरकार का ₹2,000 करोड़ से ज्यादा का इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान है। इसमें ₹1,580.36 करोड़ मशीनीकरण (Mechanization) के लिए और ₹427.80 करोड़ नेविगेशन व सुरक्षा सुधारों पर खर्च किए गए हैं। इन बदलावों का लक्ष्य जहाज के टर्नअराउंड टाइम को घटाना है ताकि ओडिशा और आसपास के राज्यों की बढ़ती मांग को तेजी से पूरा किया जा सके।
निवेश के जोखिम और भविष्य की राह
मैरीटाइम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा काफी सख्त है। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि बंदरगाह का प्रदर्शन ग्लोबल कमोडिटी मार्केट और स्टील की डिमांड पर निर्भर करता है। अगर ग्लोबल डिमांड में सुस्ती आती है, तो इसका सीधा असर पोर्ट के थ्रूपुट पर पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये सुधार कार्गो हैंडलिंग वॉल्यूम को कितना और कब तक बढ़ा पाते हैं।
