Ministry of Ports, Shipping and Waterways ने Odisha के Paradip Port को Indian Ports Act, 2025 के तहत 'Mega Port' घोषित कर दिया है। इस फैसले से पूर्वी तट पर व्यापार को रफ्तार मिलेगी और कार्गो हैंडलिंग की लागत कम होने की उम्मीद है।
भारत सरकार ने ओड़िशा स्थित Paradip Port को 'Mega Port' का दर्जा देकर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। Indian Ports Act, 2025 के तहत मिली यह मान्यता इस पोर्ट को पूर्वी तट का पहला 'मेगा पोर्ट' बनाती है। अब यह पोर्ट Deendayal Port, Jawaharlal Nehru Port और Mundra Port जैसे दिग्गज पोर्ट्स की श्रेणी में खड़ा हो गया है।\n\n### औद्योगिक लॉजिस्टिक्स के लिए गेम-चेंजर\nनिवेशकों के लिए यह महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है। Paradip Port कोयले और आयरन ओर जैसे बल्क कमोडिटी ट्रेड का मुख्य द्वार है। ओड़िशा में मौजूद स्टील, एल्युमिनियम और पावर सेक्टर की बड़ी कंपनियों को इससे सीधा फायदा होगा। अब पोर्ट पर स्टैंडर्ड ऑपरेशनल प्रोटोकॉल लागू होंगे, जिससे जहाजों का टर्नअराउंड समय घटेगा और कंपनियों की लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम होने से उनके प्रॉफिट मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है।\n\n### कॉम्पिटिशन और चुनौती\nपूर्वी तट पर Paradip Port का मुकाबला Dhamra Port और Kolkata-Haldia पोर्ट सिस्टम से है। 'मेगा पोर्ट' का टैग मिलने के बाद Paradip Port Authority अब इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिकीकरण पर ज्यादा तेजी से काम कर पाएगी, ताकि प्राइवेट पोर्ट्स की तुलना में अपनी परिचालन गति को और बेहतर बनाया जा सके।\n\n### निवेशकों को क्या देखना चाहिए?\nआने वाली तिमाही में निवेशकों को पोर्ट की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन, रेल और रोड के जरिए कार्गो निकासी की गति, और नए 2025 फ्रेमवर्क के तहत मिलने वाली फंडिंग पर नजर रखनी चाहिए। पूर्वी भारत में लॉजिस्टिक्स की लागत कम होना सीधे तौर पर उन कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत है जो कच्चे माल के आयात और तैयार माल के निर्यात के लिए इस रूट का इस्तेमाल करती हैं।
