रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन का राज
Paradip Port Authority की यह लगातार बढ़ती हुई परफॉरमेंस भारतीय समुद्री क्षेत्र के मजबूत विकास को दर्शाती है। पोर्ट की ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) और क्षमता लगातार बढ़ रही है, जिससे यह देश के व्यापार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जनवरी में कार्गो की बम्पर लोडिंग
जनवरी 2025 में 14.44 MMT कार्गो हैंडल करके PPA देश के प्रमुख पोर्ट्स में सबसे आगे निकल गया है। इसने जनवरी 2024 के 14.32 MMT के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यह पोर्ट की बढ़ती क्षमता और ऑपरेशनल स्किल्स का सबूत है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में, PPA अब तक कुल 150.41 MMT कार्गो हैंडल कर चुका है, जो इसे भारत के टॉप परफॉर्मिंग पोर्ट्स में से एक बनाता है।
विकास के पीछे की रणनीतियाँ
पोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, इस शानदार प्रदर्शन के पीछे मुख्य कारण इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) का लगातार अपग्रेडेशन और प्रक्रियाओं को आसान बनाना है। पोर्ट में मॉडर्न फैसिलिटीज़ (facilities) पर निवेश किया गया है और सभी स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन (coordination) बनाया गया है। इस वजह से पोर्ट बढ़ते कार्गो वॉल्यूम (volume) को आसानी से मैनेज कर पा रहा है। PPA की बर्थ प्रोडक्टिविटी (berth productivity) राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी है, जो इसके बेहतरीन परफॉरमेंस में बड़ा योगदान देती है।
कॉम्पिटिशन में सबसे आगे
जनवरी 2025 में, Paradip Port 14.13 MMT कार्गो के साथ अन्य प्रमुख भारतीय पोर्ट्स से आगे रहा। Deendayal Port 13.10 MMT और Jawaharlal Nehru Port Authority (JNPT) 7.92 MMT के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में PPA और Deendayal Port Authority 150 MMT कार्गो हैंडलिंग का आंकड़ा पार करने वाले पहले पोर्ट बने।
भविष्य की योजनाएँ
Paradip Port Authority की भविष्य की योजनाएं भी काफी महत्वाकांक्षी हैं। पोर्ट 2030 तक अपनी क्षमता 400 MTPA तक और 2047 तक 500 MTPA तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। वेस्टर्न डॉक (Western Dock) के विस्तार और ग्रीन हाइड्रोजन (green hydrogen) के लिए एक डेडिकेटेड बर्थ (dedicated berth) जैसी परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। PPA के चेयरमैन P. L. Haranadh ने इस सफलता का श्रेय यूनियन मिनिस्टर Sarbananda Sonowal की स्ट्रैटेजिक विजन (strategic vision) और पोर्ट के कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों को दिया है। यह सब भारत सरकार की सागरमाला प्रोग्राम (Sagarmala Programme) और मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 (Maritime India Vision 2030) जैसी पहलों का ही नतीजा है, जिनका मकसद भारतीय पोर्ट्स को ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव (competitive) बनाना है।