Pakistan ने अपनी एयरस्पेस से ताइवानी एयरलाइंस पर रोक लगा दी है। इसके चलते China Airlines और EVA Airways को अपने रूट बदलने पड़ेंगे, जिससे फ्यूल का खर्च बढ़ना तय है।
जियो-पॉलिटिक्स का एयरलाइंस पर असर
पाकिस्तान सरकार ने 'वन-चाइना पॉलिसी' का हवाला देते हुए ताइवानी विमानों के लिए अपनी एयरस्पेस को बंद कर दिया है। इस फैसले की सीधी मार China Airlines और EVA Airways पर पड़ी है। इन एयरलाइंस को अब एशिया और यूरोप के बीच लंबी दूरी तय करनी होगी, क्योंकि उन्हें अपने पुराने और छोटे फ्लाइट पाथ को छोड़ना पड़ रहा है।
फ्यूल कॉस्ट की बढ़ती टेंशन
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय 'फ्यूल बर्न' है। ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल (Crude Oil) फिलहाल $115 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। ऐसे में फ्लाइट का समय बढ़ना और लंबी दूरी तय करना सीधे तौर पर कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन को नुकसान पहुँचाएगा। जब एयरलाइंस अपने अगले तिमाही नतीजे (Quarterly Results) पेश करेंगी, तो निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि फ्यूल के इस अतिरिक्त खर्च का कितना असर मुनाफे पर पड़ा है।
ऑपरेशन्स पर बड़ा दबाव
सिर्फ फ्यूल ही नहीं, बल्कि लंबी फ्लाइट्स का मतलब है ज्यादा क्रू आवर्स (Crew Hours) और लॉजिस्टिक मैनेजमेंट में मुश्किल। यह पूरी स्थिति पाकिस्तान और चीन के बीच की गहरी कूटनीतिक रणनीतियों का परिणाम है। अब बाजार इस बात पर नजर रख रहा है कि क्या ये कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च को टिकट की कीमतों (Ticket Pricing) में बढ़ोतरी करके ग्राहकों पर डाल पाएंगी, या फिर उन्हें खुद मार्जिन का नुकसान उठाना पड़ेगा। निवेशकों को मैनेजमेंट की भविष्य की कमेंट्री और फ्यूल हेजिंग स्ट्रैटेजी पर बारीक नजर बनाए रखनी चाहिए।
