PNC Infratech ने NHAI के साथ दो बड़े हाईवे प्रोजेक्ट के लिए डील पक्की कर ली है, जिनकी कुल वैल्यू करीब **₹3,483 करोड़** है। हालांकि, कंपनी इस समय कई नियामक जांचों का सामना कर रही है, जिससे भविष्य में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
नए प्रोजेक्ट्स पर लगी मुहर, पर सवालों के घेरे में कंपनी
PNC Infratech Limited ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के साथ हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत दो नए हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए कंसेशन एग्रीमेंट साइन किए हैं। इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत लगभग ₹3,483 करोड़ है। उत्तर प्रदेश में NH-927 के बाराबंकी-मुस्तफाबाद और मुस्तफाबाद-बिसवां सेक्शन को फोर-लेन बनाने का काम कंपनी को सौंपा गया है। ये डील 16 जुलाई, 2026 को फाइनल हुई हैं। आमतौर पर ऐसे ऑर्डर कंपनी के लिए पॉजिटिव माने जाते हैं, लेकिन PNC Infratech के लिए यह खबर ऐसे समय आई है जब कंपनी कई गंभीर जांचों का सामना कर रही है।
क्वालिटी में लापरवाही और 'नॉन-परफॉर्मर' का खतरा
खबरों के मुताबिक, कंपनी पर कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर क्वालिटी में गंभीर खामियां बरतने का आरोप है। एक 300 मीटर लंबे हिस्से में भारी नुकसान देखा गया है। इसके चलते NHAI ने कंपनी को 'नॉन-परफॉर्मर' घोषित करने के लिए शो-कॉज नोटिस जारी किया है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो PNC Infratech को कुछ समय के लिए सरकारी टेंडरों से बाहर किया जा सकता है। NHAI ने कंपनी की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का 2% जुर्माना लगाने और मुख्य टेक्निकल स्टाफ को 3 साल तक के लिए डीबार करने का प्रस्ताव भी दिया है। कंपनी इन आरोपों का खंडन कर रही है और अधिकारियों के साथ सहयोग करने की बात कह रही है।
CBI की जांच और बढ़ता दबाव
इसके अलावा, PNC Infratech 2024 से सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की जांच के दायरे में भी है। कंपनी पर प्रोजेक्ट अप्रूवल और अन्य आधिकारिक मामलों को प्रभावित करने के लिए रिश्वत देने के आरोप लगे हैं। इस जांच के चलते पहले ही एक NHAI अधिकारी की गिरफ्तारी हो चुकी है और कंपनी के प्रतिनिधियों से पूछताछ जारी है। इन सब मसलों को देखते हुए निवेशकों के मन में कंपनी की साख और भविष्य में प्रोजेक्ट्स हासिल करने की क्षमता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शेयर बाजार का रिएक्शन और आगे की राह
इन रेगुलेटरी डेवलपमेंट के बीच, PNC Infratech का शेयर ₹240.88 के आसपास ट्रेड कर रहा है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कंपनी क्वालिटी विवादों और कानूनी आरोपों का समाधान ऐसे तरीके से कर पाएगी कि वह नए NHAI प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगा सके। कंपनी के पुराने प्रोजेक्ट्स के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, खासकर यह देखने के लिए कि इन विवादों का नए प्रोजेक्ट्स के कैश फ्लो और टाइमलाइन पर क्या असर पड़ेगा।
आगे चलकर, निवेशकों की नजर NHAI के शो-कॉज नोटिस के फाइनल नतीजों, CBI जांच में होने वाली प्रगति और मैनेजमेंट की प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन क्षमता पर बनी रहेगी। किसी भी तरह की नई रेगुलेटरी कार्रवाई, जैसे कि ऑफिशियल ब्लैकलिस्टिंग या भारी जुर्माना, कंपनी के ऑर्डर बुक की स्थिरता के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।
