Pune Mahanagar Parivahan Mahamandal (PMPML) अपने **11 लाख** दैनिक यात्रियों को बनाए रखने के लिए किराया नहीं बढ़ा रही है और इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का तेजी से विस्तार कर रही है। हालांकि, भारी ऑपरेशनल घाटे और कर्ज के बोझ ने कंपनी की आर्थिक स्थिति को चुनौती में डाल दिया है।
Pune Mahanagar Parivahan Mahamandal Ltd (PMPML) ने अपनी सभी एसी और नॉन-एसी बसों का किराया समान रखा है। इस आसान प्राइसिंग स्ट्रेटजी का मकसद अपने 11 लाख डेली राइडर्स के बेस को बरकरार रखना है। पुणे मेट्रो के विस्तार के बावजूद कंपनी अपने यात्री आधार को काफी हद तक बनाए रखने में सफल रही है, जो यह दर्शाता है कि अफोर्डेबल ट्रांसपोर्ट की मांग आज भी जबरदस्त है।
विस्तार का मॉडल (GCC Model)
कंपनी विस्तार के लिए Gross Cost Contract (GCC) मॉडल का इस्तेमाल कर रही है। इसके तहत प्राइवेट ऑपरेटर्स बसें उपलब्ध कराते हैं और मेंटेनेंस का काम संभालते हैं, जबकि PMPML उन्हें ऑपरेशनल फीस चुकाती है। वर्तमान में शहर में 620 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं और 2027 के अंत तक इस बेड़े में और भी बड़ी संख्या में बसें शामिल करने की योजना है। इस मॉडल के जरिए कंपनी भारी-भरकम शुरुआती निवेश से बच रही है, हालांकि लंबी अवधि की फीस का बोझ अब भी बरकरार है।
आर्थिक चुनौतियां और देनदारी
आंकड़े बताते हैं कि कंपनी पिछले एक दशक में ₹3,863.1 करोड़ का ऑपरेशनल लॉस झेल चुकी है। सिर्फ फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में ही कंपनी को ₹818 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, फ्यूल सप्लायर्स और प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स का करीब ₹299.84 करोड़ का बकाया पेमेंट चुकाना बाकी है, जो कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भविष्य की योजनाएं
इलेक्ट्रिक बसों की बढ़ती संख्या के लिए पार्किंग और चार्जिंग स्टेशनों की कमी सबसे बड़ी रुकावट (bottleneck) बनी हुई है। इस कमी को दूर करने और कमाई के वैकल्पिक स्रोत तलाशने के लिए PMPML अपनी 32 लैंड पार्सल्स को मॉनेटाइज करने की योजना बना रही है। मेट्रो और रेल ऑपरेशंस की तरह, कंपनी इन जमीनों का कमर्शियल इस्तेमाल करके अपना रेवेन्यू बढ़ाने की कोशिश करेगी, ताकि टिकट बिक्री पर निर्भरता कम हो सके।
अब निवेशकों और आम जनता की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को कैसे सुधारती है और 2027 तक नई बसों के बेड़े को किस तरह मैनेज करती है।
