ओडिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का दबदबा बढ़ा है, जून 2026 तक राज्य ने **17%** मार्केट शेयर हासिल कर लिया है। यह सरकारी नीतियों और फंडिग का नतीजा है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में बिजली की अनिश्चितता, मुश्किल रास्ते और चार्जिंग इंफ्रा की कमी जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। निवेशकों को अब देखना होगा कि क्या इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश इन शहरी और ग्रामीण अंतर को पाट पाएंगे।
ओडिशा में EV की दस्तक: 17% मार्केट शेयर पर ग्रामीण चुनौतियां
ओडिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार तेज हो गई है। जून 2026 तक राज्य ने 17% मार्केट शेयर पर कब्जा कर लिया है। यह कमाल सरकारी नीतियों और केंद्र सरकार की मदद से हुआ है। खास बात यह है कि 1 जून 2026 से सरकारी विभागों में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की ही खरीद अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा, केंद्र की PM E-DRIVE स्कीम के तहत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए ₹40.50 करोड़ से ज़्यादा का फंड भी राज्य को मिला है।
ग्रामीण इलाकों की हकीकत: बिजली, रास्ता और कीमत का रोड़ा
लेकिन शहरी इलाकों से हटकर, कालाहांडी और कोरापुट जैसे पहाड़ी और ग्रामीण जिलों में तस्वीर बिल्कुल अलग है। यहां के लोगों का कहना है कि बुनियादी ढांचे की कमी EV अपनाने में सबसे बड़ी रुकावट है। ग्रामीण इलाकों में बिजली की सप्लाई अक्सर रुक-रुक कर होती है, जिससे गाड़ियों को चार्ज करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही, पहाड़ी रास्तों पर EV की रेंज और परफॉर्मेंस पर भी असर पड़ता है। इन दिक्कतों की वजह से, सब्सिडी मिलने के बावजूद, कई ग्रामीण उपभोक्ता EV खरीदने से कतरा रहे हैं। बता दें कि राज्य की सब्सिडी को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का जाल बिछाने की तैयारी
इन बाधाओं को दूर करने के लिए, ओडिशा स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (OSRTC) बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। राज्य दिसंबर 2026 तक 100 नई ई-बसें चलाने की योजना बना रहा है, और अगले चार सालों में हर साल 100 और बसें जोड़ी जाएंगी। इसके अलावा, 314 ब्लॉक में 324 अटल बस स्टैंड पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। ये स्टेशन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर बन रहे हैं और टू-व्हीलर के लिए 10 kW से लेकर भारी वाहनों के लिए 240 kW तक के चार्जर सपोर्ट करेंगे।
निवेशकों के लिए खास: एग्जीक्यूशन रिस्क और ग्रिड की स्थिरता
निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में कितना वक्त लगेगा। ओडिशा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (OERC) ने अगस्त 2026 में नए नियम प्रस्तावित किए हैं, जिनका मकसद रिन्यूएबल एनर्जी और बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देकर ग्रिड को बेहतर बनाना है। हालांकि, राज्य के EV मिशन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्रिड सुधार कितनी तेजी से होते हैं।
सुदूर इलाकों में हाई-टेक EV को मेंटेन करना भी एक बड़ी चुनौती है। अगर राज्य ग्रामीण बिजली सप्लाई को स्थिर नहीं कर पाता और भरोसेमंद चार्जिंग नेटवर्क नहीं बना पाता, तो EV की ग्रोथ उम्मीद से धीमी रह सकती है। अगले कुछ तिमाहियों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ग्रामीण इलाकों में चार्जिंग स्टेशन कितनी तेजी से चालू होते हैं और पहाड़ी रास्तों पर नई ई-बसों का प्रदर्शन कैसा रहता है।
