उत्तरी भारत में एविएशन का बूम
उत्तरी भारत का एविएशन सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है, जहां यात्रियों और विमानों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। AAI के उत्तरी क्षेत्र में दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मुख्य हब बनाते हुए, कई बड़े शहरों में नए टर्मिनल और इंटरनेशनल हब तैयार हो रहे हैं। जोधपुर में नया एयरपोर्ट लगभग तैयार है, तो वहीं जुलाई तक उदयपुर और लेह के एयरपोर्ट्स में भी अपग्रेडेशन हो जाएगा। वाराणसी को साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में एक इंटरनेशनल हब के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके अलावा, कोटा में एक नया एयरपोर्ट बनाने की योजना है और आगरा के टर्मिनल का काम 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह सब मिलकर भारत के एविएशन ग्रोथ को सहारा दे रहा है, जिसके 2031 तक 665 मिलियन यात्रियों तक पहुंचने का अनुमान है।
ऑपरेशनल चुनौतियाँ: कोहरा और विमानों की कमी
इतने बड़े विस्तार के बावजूद, उत्तरी भारत के एयरपोर्ट्स को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सर्दियों के महीनों में पड़ने वाला घना कोहरा, खासकर सुबह के समय, उड़ानों में भारी देरी, कैंसिलेशन और एयरपोर्ट पर भीड़ का कारण बनता है। ऐसी स्थिति में, कम विजिबिलिटी के कारण ILS (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी भी काम करना बंद कर देती है।
एक और बड़ी समस्या है छोटे विमानों की कमी, जो रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम UDAN (उड़ान) के लिए बेहद ज़रूरी हैं। इन छोटे विमानों की कमी के चलते कई UDAN रूट बंद हो गए हैं, क्योंकि एयरलाइंस उन्हें ऑपरेट नहीं कर पा रही हैं। सब्सिडी मिलने के बावजूद भी कई रूट मुनाफे में नहीं चल पा रहे हैं, जो स्कीम की व्यवहार्यता पर सवाल खड़े करता है। राष्ट्रीय स्तर पर भी, ग्लोबल फैक्टर और करेंसी में उतार-चढ़ाव के कारण FY26 में एविएशन सेक्टर की ग्रोथ 0% से 3% के बीच रहने का अनुमान है, और एयरलाइंस को घाटे का सामना करना पड़ सकता है।
AAI की वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाएं
AAI अपने एयरपोर्ट्स को ज़्यादा इको-फ्रेंडली बनाने की दिशा में काम कर रहा है और 2030 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सोलर पावर और ग्रीन बिल्डिंग डिज़ाइन जैसी पहलों को अपनाया जा रहा है। हालांकि, AAI की अपनी वित्तीय स्थिति कुछ हद तक प्राइवेट किए गए एयरपोर्ट्स से मिलने वाले भुगतान पर निर्भर कर रही है। सूत्रों के अनुसार, FY25 में AAI के 75% से ज़्यादा ऑपरेशनल एयरपोर्ट्स ने घाटा दर्ज किया है।
भविष्य को देखते हुए, AAI एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम को AI और नई टेक्नोलॉजी से अपग्रेड करने की योजना बना रहा है। साथ ही, यात्री अनुभव को बेहतर बनाने के लिए डिजी यात्रा (Digi Yatra) और फ्री वाई-फाई जैसी सुविधाएं भी जारी रहेंगी। लेकिन, असली ग्रोथ तब ही संभव होगी जब मौसम की मार और छोटे विमानों की कमी जैसी समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा।