उद्घाटन की दहलीज पर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है कि नोएडा का जेवर एयरपोर्ट इसी महीने यानी फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित किया जा सकता है। एयरपोर्ट लगभग तैयार है और एयरोड्रम लाइसेंस की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। यह सुविधा उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा, जो राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ाने की आक्रामक रणनीति का प्रतीक है।
डेवलपर फोकस: Flughafen Zürich AG
इस विशाल परियोजना के डेवलपर, Flughafen Zürich AG (ZRH.SW) के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग 4.2 अरब स्विस फ्रैंक है। कंपनी का शेयर 23.5 के P/E रेश्यो पर कारोबार कर रहा है और इसकी कीमत करीब 262.50 स्विस फ्रैंक है। रोजाना औसतन 15,000 शेयर का ट्रेड होता है। इस परियोजना का सफल लॉन्च निवेशकों के लिए कंपनी के अंतरराष्ट्रीय पोर्टफोलियो के रणनीतिक मूल्य को पुष्ट करेगा।
UP की आर्थिक महात्वाकांक्षा
यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट, एक बड़े पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत गौतम बुद्ध नगर जिले में विकसित किया जा रहा है। परियोजना का पहला चरण लगभग 1,300 हेक्टेयर ज़मीन पर फैला है। इसके चालू होने से क्षेत्रीय व्यापार, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन के बुनियादी ढांचे को बड़ी मजबूती मिलेगी। इस एयरपोर्ट के लॉन्च होने से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम पड़ाव
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, उत्तर प्रदेश की खुद को एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। इस एयरपोर्ट के खुलने से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के आसपास के इलाकों में लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ेगी और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, सितंबर 2024 के लक्ष्य से परिचालन शुरू होने में देरी हुई, यह बड़े पैमाने की ग्रीनफील्ड परियोजनाओं की जटिलताओं को दर्शाता है।
भविष्य की राह
ऑपरेशनल होने के बाद, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इसका रणनीतिक स्थान गौतम बुद्ध नगर जिले और आसपास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण आर्थिक विकास को गति देगा, विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा और समग्र कारोबारी माहौल में सुधार करेगा। यह विकास भारत के व्यापक विमानन क्षेत्र के विस्तार और अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर एकीकृत करने की दृष्टि का एक प्रमुख घटक है।