नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का लॉन्च अब अनिश्चित काल के लिए टल गया है। इसकी मुख्य वजह है भारतीय सुरक्षा नियमों के चलते एयरपोर्ट के विदेशी CEO को मिली सुरक्षा मंजूरी का रद्द होना। यह फैसला ZURICH Airport Group के लिए एक बड़ा झटका है, जिसने इस प्रोजेक्ट में बड़ी रकम निवेश की है।
CEO Stalls Airport Launch
नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के स्विस CEO, Christoph Schenellmann, को सुरक्षा मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। BCAS ने कहा है कि यह विमानन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है, विशेष रूप से 2011 के एक निर्देश के तहत, जिसमें कहा गया है कि CEO को भारतीय नागरिक होना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि CEO को सुरक्षा समन्वयक के तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल तक पहुंच की आवश्यकता होती है। यह मसला कम से कम 2022 से चल रहा है और इसने एयरपोर्ट के परिचालन शुरू होने को टाल दिया है, जो मूल रूप से 28 मार्च, 2026 को निर्धारित था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन नियमों को बदलने के अनुरोधों को भी ठुकरा दिया है, जिससे नियमों के सख्त पालन का संकेत मिलता है।
Financial Pressure Mounts
ZURICH Airport Group, अपनी सब्सिडियरी Yamuna International Airport Private Limited (YIAPL) के जरिए, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण में ₹7,200 करोड़ का निवेश कर चुकी है। प्रोजेक्ट के लॉन्च में देरी का मतलब है कि इस बड़े निवेश से राजस्व नहीं आ रहा है, जबकि खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं। इससे ग्रुप पर तत्काल वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। ZURICH Airport Group के 2025 के वित्तीय अनुमानों में पहले से ही नोएडा एयरपोर्ट के खुलने का असर शामिल था, जिससे मूल्यह्रास (depreciation) और ब्याज के कारण समेकित लाभ (consolidated profit) कम होने की उम्मीद थी। अब इस नियामकीय बाधा ने वित्तीय दबाव को और बढ़ा दिया है।
Assessing Project Risks
ZURICH Airport Group का मार्केट कैप CHF 7.6 से CHF 8.3 बिलियन के बीच है, जिसका P/E ratio लगभग 22.0 है। यह मूल्यांकन कुछ यूरोपीय प्रतिद्वंद्वियों, जैसे Fraport, की तुलना में अधिक है, जिनका P/E ratio 12-16 की रेंज में है। नोएडा एयरपोर्ट का यह मामला एक महत्वपूर्ण जोखिम जोड़ता है जो ZURICH Airport Group के मौजूदा मूल्यांकन में पूरी तरह से परिलक्षित नहीं हो सकता है। इसकी तुलना में, Navi Mumbai International Airport ने BCAS नियमों का पालन करने के लिए सक्रिय रूप से एक भारतीय CEO नियुक्त किया था, जिससे वे इस देरी से बच गए। ZURICH Airport Group की स्थिति जटिल उभरते बाजारों में जोखिम के आकलन में संभावित गलत अनुमान का संकेत देती है।
Regulatory Deadlock Threatens Returns
ZURICH Airport Group के नोएडा प्रोजेक्ट में जारी नियामकीय गतिरोध, कंपनी के अपेक्षित रिटर्न (return) के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करता है। बड़ा निवेश इस समय बिना कोई राजस्व (revenue) कमाए खर्चों को बढ़ा रहा है। 2022 से इस मुद्दे का लगातार बने रहना, और नियमों को बदलने की बार-बार की गई नाकाम कोशिशें, इसे एक सीधी प्रशासनिक समस्या के बजाय एक गहरी नियामकीय चुनौती के रूप में दर्शाती हैं। यह ZURICH Airport Group के वैश्विक विस्तार के लिए प्रोजेक्ट की समय-सीमा और लाभप्रदता के पूर्वानुमान को प्रभावित करता है।
यह स्थिति फरवरी 2026 में S&P Global Ratings के ZURICH Airport Group को 'AA-' तक अपग्रेड करने के सकारात्मक दृष्टिकोण के विपरीत है। रेटिंग ने मजबूत संचालन और नोएडा एयरपोर्ट के काम पूरा होने के करीब होने का हवाला दिया था। हालांकि यह अपग्रेड मजबूत क्रेडिट मेट्रिक्स पर आधारित था, लेकिन मौजूदा नियामकीय बाधा तत्काल परिचालन और वित्तीय अनिश्चितता पैदा करती है जो भविष्य के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। एक नया भारतीय CEO नियुक्त करना और मंजूरी हासिल करना, जिससे एयरपोर्ट का लॉन्च, जो पहले 2025 की शुरुआत और फिर अप्रैल-मई 2026 के लिए लक्षित था, अब अनिश्चित काल के लिए टल गया है। यह देरी डिविडेंड (dividend) भुगतान को भी प्रभावित कर सकती है, जो लिवरेज (leverage) के आधार पर नेट प्रॉफिट (net profit) का 50%-75% तय किया गया है।
Path Forward
ZURICH Airport Group के नोएडा प्रोजेक्ट का भविष्य, एक योग्य भारतीय CEO की तुरंत नियुक्ति और BCAS व गृह मंत्रालय से मंजूरी हासिल करने पर निर्भर करता है। इस बाधा को पार करना परिचालन शुरू करने और राजस्व उत्पन्न करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो प्रोजेक्ट की वित्तीय व्यवहार्यता और ZURICH Airport Group की भारत में निवेश रणनीति को स्पष्ट करेगा। जब तक यह हल नहीं हो जाता, यह प्रोजेक्ट ऑपरेटर के लिए एक प्रमुख वित्तीय और रणनीतिक भेद्यता (vulnerability) बना रहेगा।
