यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर तैयार हुआ है और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ा बूस्ट देगा। यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL), जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल AG की सब्सिडियरी है, ने इसे विकसित किया है। NIA का मकसद बढ़ते एयर ट्रैफिक को संभालना और आर्थिक विकास को गति देना है। यह दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) के साथ एक डुअल-एयरपोर्ट सिस्टम के तौर पर काम करेगा, जिससे यात्रियों और माल ढुलाई (Cargo) दोनों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट से उत्तर प्रदेश के ट्रिलियन-डॉलर इकोनॉमी बनने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
आर्थिक विकास को मिलेगी रफ़्तार: नौकरियां, व्यापार और क्षेत्रीय विकास
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, उत्तर प्रदेश और पूरे NCR के लिए एक बड़ा आर्थिक इंजन बनने की उम्मीद है। यह वित्त वर्ष 2038 तक उत्तर प्रदेश के GDP में 1% से अधिक का योगदान दे सकता है और लगभग ₹2 लाख करोड़ ($24 बिलियन) की आर्थिक गतिविधि को गति दे सकता है। पहले 5 सालों में एयरपोर्ट से 50,000 से अधिक डायरेक्ट जॉब्स पैदा होने का अनुमान है। इसके अलावा, एग्रीकल्चर, हॉस्पिटैलिटी और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों में 5 लाख से अधिक इनडायरेक्ट जॉब्स की उम्मीद है, जो लंबे समय में 40-50 लाख तक पहुंच सकती हैं। इस एयरपोर्ट के विकास से नोएडा और ग्रेटर नोएडा रियल एस्टेट और इंडस्ट्रियल हब के तौर पर उभरेंगे और नए टाउनशिप ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा।
एयरपोर्ट की कार्गो फैसिलिटी, जिसकी शुरुआती क्षमता सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन है और जिसे 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है, उत्तरी भारत का लॉजिस्टिक्स गेटवे बनेगी। इससे एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज को फायदा होगा और राज्य के लगभग 1 करोड़ MSMEs को ग्लोबल मार्केट से जुड़ने में मदद मिलेगी। यह कार्गो क्षमता दिल्ली के IGI को चुनौती दे सकती है, जो फिलहाल भारत का सबसे बड़ा कार्गो हैंडलिंग एयरपोर्ट है।
फिलहाल IGI एयरपोर्ट सालाना करीब 79 मिलियन यात्रियों को संभालता है और दुनिया का 9वां सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है, लेकिन यहां 70% से 80% तक कंजेशन रहता है। NIA के पहले चरण में सालाना 12 मिलियन यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी, जिसे बढ़ाकर 70 मिलियन तक ले जाने की योजना है। भारत का एविएशन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और 2030 तक 30 करोड़ डोमेस्टिक पैसेंजर्स तक पहुंचने का अनुमान है, जिसके लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की जरूरत है। यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे प्रॉपर्टी की कीमतों में भी तेजी देखी गई है, जो 2020 से 2025 के बीच 536% से अधिक बढ़ी हैं। एयरपोर्ट पर 40 एकड़ का मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) फैसिलिटी भी डेवलप की जा रही है, जो भारत के MRO सेक्टर को 2030 तक $5.7 बिलियन तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
आने वाली चुनौतियां: जोखिम और एग्जीक्यूशन हर्डल्स
हालांकि, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। PPP मॉडल में एग्जीक्यूशन रिस्क जुड़े होते हैं। भारत में एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में अक्सर जमीन अधिग्रहण, रेगुलेटरी बाधाओं और जटिल कंसेशन एग्रीमेंट्स के कारण देरी देखी गई है। ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल AG का आउटलुक भी थोड़ा कंजरवेटिव है। S&P ने 2026 में डेप्रिसिएशन और इंटरेस्ट कॉस्ट के कारण इस प्रोजेक्ट से निगेटिव नेट प्रॉफिट की आशंका जताई है, जिसका मतलब है कि शुरुआती रिटर्न डेवलपमेंट खर्चों से कम हो सकता है।
एयरपोर्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपनी अनुमानित यात्री और कार्गो क्षमता को कितना भर पाता है। इसके लिए लगातार रीजनल इकोनॉमिक ग्रोथ और IGI से ट्रैफिक को सफलतापूर्वक डायवर्ट करना जरूरी होगा। IGI एयरपोर्ट के साथ मुकाबला एक बड़ी चुनौती है, जिसके पास पहले से ही व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्क है। यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट की तेज बढ़त प्रॉपर्टी मार्केट में ओवरहीटिंग और स्पेकुलेटिव बबल का डर भी पैदा करती है। मेट्रो एक्सटेंशन और ट्रांजिट लिंक के जरिए NIA को NCR के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में इंटीग्रेट करना इसके इकोनॉमिक पोटेंशियल को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
भविष्य का दृष्टिकोण: विकास और सस्टेनेबिलिटी का लंबा विजन
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को स्केलेबल बनाया गया है, जिसमें 2040-2050 तक 70 मिलियन यात्रियों की क्षमता और 6 रनवे तक का विस्तार करने की योजना है। यह एयरपोर्ट सस्टेनेबल प्रैक्टिस अपनाकर नेट-जीरो एमिशन का लक्ष्य रखेगा।
भारत का एविएशन सेक्टर मजबूत ग्रोथ जारी रखने की उम्मीद है। NIA और IGI का डुअल-एयरपोर्ट सिस्टम दिल्ली-NCR को एक प्रमुख ग्लोबल एविएशन हब बनाने और अगले दो दशकों में 200 एयरपोर्ट विकसित करने के भारत के लक्ष्य का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह एयरपोर्ट औद्योगिक विकास, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स में, उत्तर प्रदेश को भारत का एक प्रमुख आर्थिक खिलाड़ी बनाने में मदद करेगा।