क्यों हुआ CEO का बदलाव?
यह फेरबदल उस समय हुआ जब ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने पूर्व CEO Christoph Schnellmann को सुरक्षा क्लीयरेंस देने से इनकार कर दिया। इसकी मुख्य वजह उनकी गैर-भारतीय नागरिकता बताई गई है। दरअसल, 2011 के नागरिक उड्डयन सुरक्षा नियमों के तहत, किसी भी नए भारतीय एयरपोर्ट के CEO को सुरक्षा समन्वयक (Security Coordinator) के तौर पर काम करना होता है और सुरक्षा व्यवस्था की सीधी निगरानी करनी होती है।
विदेशी CEO का नया रोल और निरंतरता
Christoph Schnellmann, जो अगस्त 2020 से एयरपोर्ट का नेतृत्व कर रहे थे, अब एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन (Executive Vice Chairman) के तौर पर प्रोजेक्ट से जुड़े रहेंगे। यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (Yamuna International Airport Pvt Ltd), जो ज्यूरिख एयरपोर्ट (Zurich Airport) की होल्डिंग कंपनी है, ने कहा है कि यह नेतृत्व परिवर्तन सुरक्षा नियमों का पालन करने और साथ ही नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने के लिए किया गया है। कंपनी के चेयरमैन Daniel Bircher ने जल्द से जल्द ऑपरेशंस शुरू करने पर जोर दिया है।
रेगुलेटरी अप्रूवल में तेजी की उम्मीद
हालांकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मार्च में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से एरोड्रम लाइसेंस (Aerodrome License) मिल चुका है, लेकिन इसके एरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम (ASP) को अभी BCAS की मंजूरी मिलनी बाकी है। Nitu Samra की नियुक्ति से इस मंजूरी में तेजी आने की उम्मीद है, जो एयरपोर्ट के नियोजित फ्लाइट ऑपरेशंस के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
