नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। यूपी के सोनौली बॉर्डर पर ट्रकों की **16 किलोमीटर** लंबी लाइन लग गई है, जिससे भारत और नेपाल के बीच का व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो गया है और सप्लाई चेन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
नेपाल में खराब मौसम और फ्लैश फ्लड्स के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के सोनौली बॉर्डर पर दिख रहा है, जहां ट्रकों की आवाजाही ठप होने से करीब 16 किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। यह रूट भारत और नेपाल के बीच व्यापार का सबसे प्रमुख जरिया है, जिसके बंद होने से दोनों देशों के बीच माल की सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाढ़ से नेपाल में करीब 19 पुल और 40 किलोमीटर लंबी सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इस कारण माल की आवाजाही के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है। सुरक्षा और स्थिति को संभालने के लिए Sashastra Seema Bal (SSB) ने बॉर्डर पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है।
सप्लाई चेन और कंपनियों पर असर
सोनौली बॉर्डर भारतीय सामानों के लिए एक मुख्य गेटवे है। जो कंपनियां FMCG, कंस्ट्रक्शन मटेरियल और प्रोसेस्ड फूड के सेक्टर में काम कर रही हैं, उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि अगर सामान समय पर नहीं पहुंचा, तो कंपनियों की लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ सकती है। कंपनियों को अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी पड़ सकती है, जो काफी महंगे साबित होंगे।
आगे क्या रहेगा फोकस?
अभी Central Water Commission और प्रशासन गंडक और त्रिशूली नदियों के जलस्तर पर पैनी नजर रखे हुए हैं। बिहार और यूपी के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। निवेशकों और बिजनेस जगत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि सड़कों और पुलों की मरम्मत में कितना समय लगेगा। जब तक ट्रांजिट रूट पूरी तरह बहाल नहीं हो जाते, तब तक व्यापारिक गतिविधियों में सुस्ती बने रहने की आशंका है।
