Navi Mumbai International Airport (NMIA) ने आखिरकार इंटरनेशनल ऑपरेशन्स शुरू कर दिए हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस की ओर से अबू धाबी के लिए हफ्ते में तीन बार सीधी उड़ान का ऐलान किया गया है। यह कदम एयरपोर्ट के डोमेस्टिक सर्विसेज शुरू होने के सात महीने बाद उठाया गया है, हालांकि यात्रियों के लिए रोड कनेक्टिविटी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
Navi Mumbai Airport का इंटरनेशनल सफर शुरू
Navi Mumbai International Airport (NMIA) ने अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात के क्षेत्र में कदम रख दिया है। बुधवार को, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने एयरपोर्ट से अबू धाबी के लिए पहली शेड्यूल इंटरनेशनल फ्लाइट लॉन्च की। यह सेवा हफ्ते में तीन दिन चलेगी और इसका लक्ष्य पश्चिमी भारत और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते बिजनेस और टूरिज्म को भुनाना है।
तेजी से बढ़ते ऑपरेशन्स
Adani Airport Holdings द्वारा मैनेज किए जा रहे इस एयरपोर्ट ने दिसंबर 2025 में डोमेस्टिक उड़ानें शुरू करने के बाद से ही तेजी से ग्रोथ दिखाई है। महज सात महीनों में, एयरपोर्ट ने 46 डोमेस्टिक रूट्स को जोड़ा है और 2.3 मिलियन से ज्यादा यात्रियों को संभाला है। रोजाना करीब 150 विमानों की आवाजाही हो रही है, जो मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में इसकी भारी डिमांड को दर्शाता है। पैसेंजर ट्रैवल के साथ-साथ, एयरपोर्ट ने इंटरनेशनल कार्गो ऑपरेशन्स भी शुरू कर दिए हैं। पहले कार्गो फ्लाइट से एक्सपोर्ट का पहला कंसाइनमेंट भेजा गया है, जिससे एयरपोर्ट के लिए पैसेंजर फीस के अलावा कमाई का एक नया जरिया भी खुल गया है।
लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की दिक्कतें
हालांकि, एयर कनेक्टिविटी का नेटवर्क बढ़ रहा है, लेकिन एयरपोर्ट को एक्सेसिबिलिटी को लेकर कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आसपास का इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें रोड नेटवर्क और पब्लिक ट्रांसपोर्ट लिंक्स शामिल हैं, अभी भी अधूरे हैं। कई यात्रियों को टर्मिनल तक पहुंचने के लिए प्राइवेट ट्रांसपोर्ट या कैब पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ये लास्ट-माइल ऑप्शन दक्षिण मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट जाने की तुलना में अक्सर महंगे पड़ते हैं, जिससे यात्रियों के लिए कॉस्ट-बेनिफिट पर असर पड़ सकता है, जब तक कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर फ्लाइट कैपेसिटी के साथ तालमेल न बिठा ले।
आगे की ग्रोथ और देखने लायक चीज़ें
निवेशकों और इंडस्ट्री के जानकारों के लिए मुख्य सवाल यह है कि NMIA कितनी जल्दी और एयरलाइंस को आकर्षित कर पाता है और ग्लोबल डेस्टिनेशन्स की लिस्ट बढ़ा पाता है। अबू धाबी रूट की सफलता भविष्य में खाड़ी के अन्य बाजारों में विस्तार के लिए एक टेस्ट केस साबित होगी। हालांकि, पश्चिम एशिया में संभावित जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं और मुंबई एविएशन मार्केट का कॉम्पिटिशन, जहां एयरलाइंस को दो बड़े एयरपोर्ट्स के बीच कैपेसिटी को बैलेंस करना होगा, ये सब अहम फैक्टर बने रहेंगे।
मार्केट अब इस बात पर नजर रखेगा कि एयरपोर्ट अथॉरिटी पैसेंजर कॉस्ट कम करने के लिए पेंडिंग रोड प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से पूरा करती है और डोमेस्टिक व इंटरनेशनल दोनों कैरियर अपनी फ्लाइट शेड्यूल को कितनी जल्दी बढ़ाते हैं। इसके अलावा, पश्चिमी भारत के लिए एक प्रमुख इंटरनेशनल ट्रांजिट हब बनने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एयरपोर्ट की हाई ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
