भारत की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ नमो भारत RRTS कॉरिडोर और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन हुआ है। यह हाई-स्पीड रेल, जो 180 kmph तक की रफ्तार से दौड़ेगी, बड़े शहरों को आपस में जोड़ेगी और सफर का समय एक घंटे से भी कम कर देगी।
nNamo Bharat RRTS और मेरठ मेट्रो का एक साथ चलना, इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करना और कैपिटल कॉस्ट (Capital Cost) कम करना, भविष्य की शहरी गतिशीलता (Urban Mobility) के लिए एक शानदार उदाहरण है। लेकिन, इस बड़ी सफलता के पीछे फंड (Fund) और लॉजिस्टिक्स (Logistics) से जुड़ी चुनौतियां भी हैं, जिन पर लगातार नज़र रखने की ज़रूरत है।
कनेक्टिविटी में बड़ा उछाल
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर और मेरठ मेट्रो के शुरू होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पूरी तरह बदलने वाली है। यह कॉरिडोर दिल्ली को साहिबाबाद, गाजियाबाद, मोदीनगर और मेरठ जैसे शहरों से जोड़ता है। 21 किलोमीटर लंबी मेरठ मेट्रो, जो इसी RRTS इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलेगी, एक अनोखा और लागत बचाने वाला इंटीग्रेशन है। इसकी रफ़्तार 120 kmph तक होगी।
इस संयुक्त नेटवर्क से दिल्ली और मेरठ के बीच का सफर अब 1.5 से 2 घंटे की बजाय एक घंटे से भी कम समय में पूरा हो सकेगा। सरई काले खान-मेरठ सेक्शन पर हर दिन 1.67 लाख यात्रियों के सफर करने की उम्मीद है। निर्माण के दौरान 2019 से 2025 के बीच लगभग 166 लाख मैन-डे (Man-days) का रोज़गार पैदा हुआ, और अब संचालन से सालाना लगभग 12 लाख मैन-डे रोज़गार मिलने का अनुमान है।
फाइनेंसियल डीटेल और सेक्टर के रुझान
भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर (Infrastructure Sector) इस समय भारी निवेश देख रहा है। भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री का P/E रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 27.5x है, हालांकि हाईवे और रेल ट्रैक्स सेगमेंट में हाल ही में निगेटिव रिटर्न (Negative Returns) देखने को मिले हैं। BSE इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स (BSE India Infrastructure Index) 17.2x के P/E पर ट्रेड कर रहा है।
दिल्ली-मेरठ RRTS प्रोजेक्ट का अनुमानित खर्च लगभग ₹30,274 करोड़ (US$3.6 बिलियन) है। इसका फंड, 20% केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से, जबकि 60% एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) जैसे मल्टीलेटरल लेंडर्स (Multilateral Lenders) से लिया गया है।
यह फंडिंग मॉडल भविष्य की शहरी-क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए एक रोल मॉडल हो सकता है। खास बात यह है कि मेरठ मेट्रो को RRTS इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ इंटीग्रेट (Integrate) करने से कैपिटल कॉस्ट (Capital Cost) में लगभग ₹6,300 करोड़ की बचत हुई है, जो सिस्टम की व्यवहार्यता (Viability) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
देश भर में मेट्रो रेल का विस्तार तेजी से हुआ है। 2014 में जहां नेटवर्क 248 km था, वहीं 2025 तक यह 1,000 km से ज़्यादा हो गया है। सरकार का इस पर भारी निवेश है और न्यूनतम 14% का इकोनॉमिक इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (EIRR) ज़रूरी है। दिल्ली-मेरठ RRTS का अनुमानित EIRR 11.33% है, जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य (Feasible) होने का संकेत देता है।
भारतीय परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर मार्केट में 2025 से 2033 तक 7.76% की CAGR (Compound Annual Growth Rate) से बढ़ोतरी की उम्मीद है। सरकारी पहलों और तेज़ शहरीकरण (Urbanization) से यह ग्रोथ मिलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश FY24 में GDP का 5.3% था, जो FY29 तक बढ़कर 6.5% होने का अनुमान है।
फंड को लेकर चिंताएं
दिल्ली-मेरठ RRTS और मेरठ मेट्रो के ऑपरेशनल सक्सेस (Operational Success) और आर्थिक संभावनाओं के बावजूद, इसके फाइनेंसियल (Financial) पहलुओं पर करीब से नज़र डाली जाए तो कुछ चिंताएं सामने आती हैं।
NCRTC (National Capital Region Transport Corporation), जो इस परियोजना को लागू कर रही है, अपने फंडिंग पाइपलाइन (Funding Pipeline) को लेकर जांच के दायरे में है। यूनियन बजट (Union Budget) से मिलने वाले फंड में लगातार कमी देखी जा रही है: FY2024-25 में ₹3,855 करोड़, FY2025-26 में ₹2,918 करोड़, और FY2026-27 के लिए अनुमानित ₹2,200 करोड़ – जो पिछले साल से 25% कम है।
यह घटता हुआ आवंटन (Allocation) महत्वाकांक्षी RRTS नेटवर्क के भविष्य के फेज (Phase) के लिए लंबी अवधि की फंडिंग पर सवाल खड़े करता है, जिसके लिए लगातार सरकारी प्रतिबद्धता और कुशल एग्जीक्यूशन (Execution) ज़रूरी है। ऐतिहासिक रूप से, बड़े पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (Public Infrastructure Projects) में लागत बढ़ने और देरी का खतरा बना रहता है।
हालांकि NCRTC एक ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) है, पर यह एक अनलिस्टेड पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज (Unlisted Public Sector Enterprise) के तौर पर काम करती है। मार्च 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) में लगभग ₹231 करोड़ के रेवेन्यू (Revenue) और ₹100 करोड़ की पेड-अप कैपिटल (Paid-up Capital) के साथ, इसके कर्ज चुकाने की क्षमता पर बारीकी से नज़र रखनी होगी, खासकर जब यह आगे और बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू करने जा रही है।
पिछले कुछ विवादों, जैसे कि CAG (Comptroller and Auditor General) की एक ड्राफ्ट ऑडिट रिपोर्ट में एग्जीक्यूटिव्स (Executives) को वाहन खर्चों और स्टाफ पेमेंट्स के तौर पर ₹39 करोड़ का अनुचित लाभ देने का खुलासा, सख्त वित्तीय सुशासन (Financial Governance) की ज़रूरत को उजागर करता है।
इसके अलावा, एनालिस्ट्स (Analysts) का ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर (Transport Infrastructure Sector) के लिए FY27 तक एक न्यूट्रल (Neutral) आउटलुक है, जिसका कारण मध्यम ग्रोथ उम्मीदें और कुछ सेगमेंट में प्रोजेक्ट अवार्ड (Project Award) की धीमी गति है। आर्थिक व्यवहार्यता, भले ही 11.33% EIRR पर टिकी हो, लगातार यात्रियों की संख्या बढ़ने और कुशल संचालन प्रबंधन पर निर्भर करेगी।
भविष्य की राह
नमो भारत RRTS नेटवर्क का विस्तार भारत की मॉडर्न, सस्टेनेबल पब्लिक ट्रांसपोर्ट (Sustainable Public Transport) की दृष्टि का एक मुख्य हिस्सा है। इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) 2025-26 में प्रमुख क्षेत्रीय क्लस्टर्स (Regional Clusters) में लगभग 2,900 km RRTS कॉरिडोर की संभावना बताई गई है, जिसमें बेंगलुरु-मैसूरु-तुम कुरु-होसुर (Bengaluru-Mysuru-Tumakuru-Hosur) और चेन्नई-वेल्लोर-विलुपुरम-चेगलपट्टू (Chennai-Vellore-Villupuram-Chengalpattu) शामिल हैं। ये भविष्य के कॉरिडोर बड़े आर्थिक मल्टीप्लायर (Economic Multipliers) को अनलॉक करेंगे और मेगा-रीजन (Mega-Regions) के विकास में मदद करेंगे।
दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर की सफलता, रोज़गार सृजन (Job Creation) और सफर के समय में कमी लाने के मामले में, एक ब्लूप्रिंट (Blueprint) का काम करेगी। स्टेशनों के आसपास ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD - Transit-Oriented Development) पर फोकस, प्लान की गई ग्रीनफील्ड टाउनशिप्स (Greenfield Townships) के साथ, पॉलीसेंट्रिक शहरी विकास (Polycentric Urban Growth) को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
हालांकि NCRTC के लिए वर्तमान बजट का रुझान ध्यान देने योग्य है, लेकिन इस तरह की हाई-स्पीड रेल प्रणालियों के ज़रिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने की सरकारी मंशा, भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य में निरंतर, हालांकि सावधानीपूर्वक प्रबंधित, निवेश का संकेत देती है।