भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अब अपने हाईवे पर बने रेस्ट एरिया में गाड़ियों की रिपेयरिंग और पंचर सर्विस अनिवार्य कर रहा है। वित्त वर्ष 2026 तक **700** से ज़्यादा ऐसी सुविधाएं खोलने की योजना है, जिसका मकसद तेज रफ्तार वाले हाईवे पर सफर को और सुरक्षित बनाना है। यह कदम उन इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए एक नया रेवेन्यू का जरिया खोलेगा जो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत इन जगहों को ऑपरेट करती हैं।
क्या है नई योजना?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपनी लॉजिस्टिक्स सहायक कंपनी, नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) को निर्देश दिया है कि हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर बने वेसाइड एमिनिटीज़ (WSAs) में गाड़ी ठीक करने और पंचर ठीक करने की सेवाओं को जल्द से जल्द शामिल किया जाए। ये एमिनिटीज़ आमतौर पर हर 40 से 60 किलोमीटर पर बनाई जा रही हैं। यह फैसला ड्राइवरों द्वारा एक्सेस-कंट्रोल्ड रूट्स पर गाड़ी खराब होने की शिकायतों के जवाब में आया है।
ऑपरेटर्स के लिए बिजनेस मॉडल
ये वेसाइड एमिनिटीज़ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित की जाती हैं। इसमें प्राइवेट कंपनियां 15 से 30 साल तक के कॉन्ट्रैक्ट के लिए बोली लगाती हैं। पहले इन कॉन्ट्रैक्ट्स में मुख्य रूप से फ्यूल, खाने-पीने और टॉयलेट जैसी बेसिक सुविधाएं शामिल थीं। अब NHAI द्वारा रिपेयरिंग शॉप्स जोड़ने की अनुमति देने से इन प्राइवेट ऑपरेटर्स के लिए कमाई की संभावना बढ़ गई है। जिन कंपनियों के पास इन सुविधाओं के कॉन्ट्रैक्ट हैं, उनके लिए यह सिर्फ खाने-पीने और फ्यूल की बिक्री के अलावा एक अलग तरह की कमाई का जरिया बन गया है, क्योंकि अब वे मैकेनिकल सर्विसेज के लिए चार्ज कर सकते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए क्यों है अहम?
निवेशकों के नजरिए से, इन वेसाइड एमिनिटीज़ की एफिशिएंसी टोल रोड एसेट्स की ओवरऑल क्वालिटी से जुड़ी होती है। एक अच्छी तरह से सर्विस की गई हाईवे पर ट्रैफिक ज्यादा होता है और यात्रियों का अनुभव बेहतर होता है। रिपेयरिंग सेवाओं को जोड़ने से एक बड़ी समस्या का समाधान होता है - सुनसान जगहों पर गाड़ी का खराब हो जाना - जिससे टोल रोड यात्रियों के लिए ज्यादा आकर्षक बन सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण और संचालन में लगी कंपनियों को तब फायदा होता है जब सरकार उन एसेट्स की उपयोगिता को बढ़ाती है जिनका वे प्रबंधन करती हैं, क्योंकि इससे किराए पर ली गई जगह पर लगातार फुटफॉल और लंबे समय तक कब्जा बना रह सकता है।
ऑपरेशनल रिस्क और ध्यान देने योग्य बातें
हालांकि रिपेयर शॉप्स को जोड़ना एक तार्किक कदम है, लेकिन इसमें कुछ ऑपरेशनल रिस्क भी हैं। इन सुविधाओं की सफलता पूरी तरह से उस हाईवे पर ट्रैफिक की मात्रा पर निर्भर करती है। अगर किसी रूट पर ट्रैफिक कम है, तो गाड़ियों की रिपेयरिंग के लिए एक स्किल्ड टीम बनाए रखना फायदे की बजाय महंगा पड़ सकता है। इसके अलावा, ऐसी सेवाएं चलाने के लिए NHAI द्वारा अनिवार्य किए गए स्टैंडर्ड सेफ्टी और क्वालिटी प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी है। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि ऑपरेटर्स के पास इन सेवाओं को बिना ज्यादा मेंटेनेंस या स्टाफिंग कॉस्ट के मुनाफे के साथ बढ़ाने की क्षमता है या नहीं।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
निवेशकों और मार्केट पार्टिसिपेंट्स को बाकी प्रोजेक्ट्स के लिए होने वाली बिडिंग के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए। वित्त वर्ष 2026 के अंत तक 700 से ज्यादा WSAs के टारगेट में से, एक बड़ी संख्या अभी भी पाइपलाइन या बिडिंग स्टेज में है। ट्रैक करने वाली मुख्य बातें पायलट प्रोजेक्ट्स में इन रिपेयर सेवाओं की मांग और क्या इन अतिरिक्त सेवाओं से होने वाली कमाई प्राइवेट ऑपरेटर्स को 15 से 30 साल की लंबी लीज अवधि में वेसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर के भारी मेंटेनेंस कॉस्ट को ऑफसेट करने में मदद करती है।
