National Highways Authority of India (NHAI) ने तमिलनाडु के Paranur Toll Plaza पर अपना पहला Multi-Lane Free Flow (MLFF) सिस्टम लॉन्च किया है। अब गाड़ियां बिना रुके टोल पार कर सकेंगी, जिससे जाम की समस्या खत्म होगी।
नई तकनीक का कमाल
NHAI ने 1 अक्टूबर, 2026 से चेन्नई–तिंडीवनम कॉरिडोर (NH-179B) पर स्थित Paranur टोल प्लाजा पर इस एडवांस सिस्टम की शुरुआत की है। इस सिस्टम की खासियत यह है कि इसमें कोई भी फिजिकल बैरियर (गेट) नहीं होगा। इसमें ऊपर की तरफ गैंट्री लगाई गई है, जिसमें दो तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है: पहला RFID रीडर, जो FASTag को स्कैन करेगा और दूसरा AI-इनेबल्ड ANPR कैमरा, जो गाड़ी की नंबर प्लेट को तुरंत पहचान लेगा। इससे गाड़ियां बिना अपनी रफ्तार कम किए टोल पार कर सकेंगी।
प्राइवेट ऑपरेटर्स के लिए क्या हैं चुनौतियां?
यह बदलाव भले ही ट्रैफिक के लिए अच्छा है, लेकिन प्राइवेट कंपनियों के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है। PPP मॉडल के तहत काम करने वाले ऑपरेटर्स के लिए अब रेवेन्यू कलेक्शन पूरी तरह से सिस्टम की एक्यूरेसी पर निर्भर करेगा। अगर सिस्टम गाड़ी या FASTag को सही से ट्रैक नहीं कर पाता, तो रेवेन्यू लीक (Revenue Leakage) का खतरा बना रहेगा। इसी को देखते हुए सरकार प्राइवेट ऑपरेटर्स के लिए कंपनसेशन पॉलिसी तैयार कर रही है ताकि उन्हें किसी भी फाइनेंशियल नुकसान से बचाया जा सके।
डिजिटल एनफोर्समेंट का नया दौर
अब बिना वैध FASTag या बैलेंस के गाड़ी ले जाने वालों पर नजर रखने के लिए डिजिटल एनफोर्समेंट का सहारा लिया जाएगा। ऐसे वाहनों को ऑटोमैटिक इलेक्ट्रॉनिक पेनल्टी नोटिस भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया मैन्युअल टोल कलेक्शन से पूरी तरह अलग है, जहाँ तुरंत पैसा वसूला जाता था।
देश भर में विस्तार
Paranur के बाद NHAI अब इस सिस्टम को अन्य प्रमुख टोल प्लाजा जैसे Nemili और Chennasamudram पर भी लागू करने की तैयारी में है। इससे पहले गुजरात, दिल्ली-NCR, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में भी इसी तरह के ट्रायल सफल रहे हैं। सड़क बुनियादी ढांचा क्षेत्र के निवेशकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब पूरी तरह से डेटा-आधारित टोलिंग सिस्टम पर शिफ्ट होना अनिवार्य हो गया है।
