NHAI का बड़ा फैसला: हाईवे इंजीनियरों की सैलरी बढ़ेगी, क्वालिटी और स्पीड पर फोकस

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AuthorNeha Patil|Published at:
NHAI का बड़ा फैसला: हाईवे इंजीनियरों की सैलरी बढ़ेगी, क्वालिटी और स्पीड पर फोकस

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने हाईवे प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले इंजीनियरों और टेक्निकल स्टाफ के लिए न्यूनतम सैलरी की नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। इसका मकसद क्वालिटी को बेहतर बनाना और प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करवाना है।

Detailed Coverage

न्यूनतम सैलरी की नई सीमाएं तय

NHAI ने नेशनल हाईवे डेवलपमेंट में लगे टेक्निकल प्रोफेशनल्स के लिए एक नया रेमुनरेशन (remuneration) फ्रेमवर्क पेश किया है। इस नियम के तहत, अलग-अलग विशेषज्ञ पदों के लिए मासिक सैलरी की न्यूनतम सीमाएं तय कर दी गई हैं। इसका लक्ष्य देश भर के रोड नेटवर्क में प्रोजेक्ट सुपरविजन की क्वालिटी और लॉन्ग-टर्म एग्जीक्यूशन एफिशिएंसी को बेहतर बनाना है।

नई गाइडलाइन्स के अनुसार, टीम लीडर्स और ब्रिज या स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स को अब हर महीने कम से कम ₹5.00 लाख का भुगतान किया जाएगा। इसी तरह, रेजिडेंट कम हाईवे इंजीनियर्स, प्रोग्राम शेड्यूल रिव्यूअर्स, सीनियर क्वालिटी कम मटेरियल एक्सपर्ट्स और सीनियर पेमेंट स्पेशलिस्ट को हर महीने कम से कम ₹3.50 लाख मिलेंगे। वहीं, रोड सेफ्टी एक्सपर्ट्स के लिए यह सीमा ₹2.50 लाख, सब-प्रोफेशनल सिविल इंजीनियर्स के लिए ₹1.50 लाख और यंग प्रोफेशनल सिविल इंजीनियर्स के लिए ₹1.00 लाख प्रति माह तय की गई है।

अनुभवी टैलेंट को बनाए रखने पर जोर

सैलरी की सीमाएं तय करने के अलावा, NHAI डोमेन एक्सपर्टाइज (domain expertise) को बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहा है। रिवाइज्ड पॉलिसी के तहत, हाईवे प्रोजेक्ट्स पर कंसल्टेंसी फर्म्स द्वारा नियुक्त किए जाने वाले सब-प्रोफेशनल इंजीनियरिंग स्टाफ में कम से कम 20% ऐसे प्रोफेशनल होने चाहिए जिन्होंने पहले NHAI, मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज (MoRTH) या नेशनल हाईवेज़ एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NHIDCL) के साथ काम किया हो। इन अनुभवी साइट इंजीनियर्स को प्रोजेक्ट लाइफसाइकिल में वापस लाकर, अथॉरिटी हाईवे प्लानिंग और कंस्ट्रक्शन सुपरविजन में अपने इंस्टीट्यूशनल नॉलेज (institutional knowledge) का फायदा उठाना चाहती है।

प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और लागत पर असर

इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेस में इन्वेस्टर्स (investors) और स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) के लिए, यह कदम क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को ऊपर उठाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कॉम्पिटिटिव (competitive) सैलरीज को अनिवार्य करके, NHAI कंसल्टेंसी फर्म्स के भीतर टैलेंट टर्नओवर (talent turnover) को कम करना चाहता है, जो ऐतिहासिक रूप से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में एक चुनौती रही है। भले ही इससे इन प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाली कंसल्टेंसी कंपनियों के ऑपरेशनल कॉस्ट (operational costs) में बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन इसका उद्देश्य प्रोजेक्ट में देरी और निम्न-गुणवत्ता वाले कंस्ट्रक्शन से जुड़े लॉन्ग-टर्म रिस्क (long-term risks) को कम करना है।

इन्वेस्टर्स इस बात पर नजर रख सकते हैं कि सैलरी मैंडेट्स (salary mandates) रोड कंसल्टेंसी फर्म्स के ऑपरेटिंग मार्जिन (operating margins) को कैसे प्रभावित करते हैं और क्या इस कदम से प्रोजेक्ट क्लीयरेंस (project clearances) तेज होते हैं और एग्जीक्यूशन में बाधाएं कम होती हैं। सेक्टर में प्रोजेक्ट डिलीवरी टाइमलाइन्स (project delivery timelines) को बेहतर बनाने में इस पॉलिसी की प्रभावशीलता एक महत्वपूर्ण क्षेत्र होगी जिस पर लंबे समय तक नजर रखी जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.