नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने तमिलनाडु में 2,500 किलोमीटर नए हाईवे बनाने के लिए ₹91,000 करोड़ की एक बड़ी योजना का ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट का मकसद इंडस्ट्रियल और पोर्ट कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है, जिससे राज्य के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा।
तमिलनाडु में ₹91,000 करोड़ का बड़ा इंफ्रा बूस्ट
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने तमिलनाडु में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए एक लंबी अवधि की रणनीति का खुलासा किया है। इसके तहत ₹91,000 करोड़ के निवेश से 2,500 किलोमीटर नए हाईवे बनाए जाएंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य माल ढुलाई (freight movement) और प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर्स व पोर्ट्स तक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। यह बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पुश राज्य की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट इकोनॉमी को सहारा देगा। इसके अलावा, ₹33,000 करोड़ से अधिक की लागत से 855 किलोमीटर के हाईवे प्रोजेक्ट्स पर पहले से ही काम चल रहा है।
प्रमुख कॉरिडोर और कनेक्टिविटी
इस योजना में कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं, जैसे चेन्नई-तिरुचि-मदुरै ग्रीनफील्ड एक्सेस- कंट्रोल्ड कॉरिडोर और NH-32 के चेंगलपट्टू-तिंडिवनम सेक्शन का सिक्स-लेन विस्तार। साथ ही, NH-48 पर NH-48 पर मडुरवोयल से श्रीपेरुम्बुदूर तक एलिवेटेड कॉरिडोर और NH-32 के नागरकोविल-तुतुकुडी-कन्याकुमारी स्ट्रेच का फोर-लेन विस्तार करके लॉजिस्टिक्स को सुधारा जाएगा। कुड्डलोर पोर्ट (Cuddalore Port) तक बेहतर कनेक्टिविटी भी एक अहम प्राथमिकता है, क्योंकि राज्य का लक्ष्य अपने ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को प्रमुख समुद्री हब से जोड़ना है।
राज्य सरकार के साथ मिलकर काम
NHAI के अलग प्रोजेक्ट्स के अलावा, 'विजन 2035' के तहत सड़क क्षेत्र के लिए एक व्यापक सहयोगात्मक दृष्टिकोण सामने आया है। स्टेट हाईवेज डिपार्टमेंट के साथ मिलकर तैयार की गई इस पहल में 144 कॉरिडोर पर 4,543.5 किलोमीटर में कुल ₹1,36,996 करोड़ के निवेश का अनुमान है। NHAI इस कुल राशि में से लगभग ₹84,891 करोड़ का योगदान देगा, जबकि स्टेट हाईवेज डिपार्टमेंट ₹52,105 करोड़ का प्रबंधन करेगा। इस सहयोग में एयरपोर्ट कनेक्टिविटी को भी प्राथमिकता दी गई है, जिसमें प्रमुख हब को जोड़ने के लिए कई प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। कोयंबटूर, मदुरै और होसुर में सड़क विकास के मास्टर प्लान को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि तुतुकुडी के प्लान की समीक्षा की जा रही है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
निवेशकों के लिए, ये बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स इस क्षेत्र में कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग और मटेरियल सप्लाई सेवाओं की निरंतर मांग का संकेत देते हैं। हालांकि, इन फायदों का वास्तविक लाभ भूमि अधिग्रहण की गति, समय पर एग्जीक्यूशन और केंद्रीय व राज्य-स्तरीय प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। ऐतिहासिक रूप से, बड़े सड़क क्षेत्र निवेशों को प्रोजेक्ट में देरी, कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता के कारण लागत बढ़ने और भूमि मंजूरी में रेगुलेटरी बाधाओं जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों को प्रोजेक्ट कमीशनिंग टाइमलाइन, प्राइवेट प्लेयर्स को कॉन्ट्रैक्ट्स मिलने और जैसे-जैसे ये कॉरिडोर प्लानिंग से कंस्ट्रक्शन स्टेज में बदलेंगे, वास्तविक कैश फ्लो डिप्लॉयमेंट पर नजर रखनी चाहिए।
