National Highways Authority of India (NHAI) ने अब टोल प्लाजा के ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। भविष्य के सभी प्रोजेक्ट्स में अब 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) सिस्टम लागू होगा, जिससे वाहनों को बिना रुके टोल चुकाने की सुविधा मिलेगी।
NHAI ने अब भविष्य के हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए टोलिंग के पूरे सिस्टम को बदलने का ऐलान किया है। नई गाइडलाइन्स के तहत टोल प्लाजा अब सिर्फ 8 लेन के ही होंगे, जबकि पहले के हाई-ट्रैफिक रूटों पर यह 32 लेन तक बड़े हुआ करते थे।
नई टेक्नोलॉजी का कमाल
अब टोल कलेक्शन के लिए बड़े प्लाजा की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय, ओवरहेड गैन्ट्री (Gantries) लगाई जाएंगी, जिनमें RFID और ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरे लगे होंगे। इससे गाड़ियां बिना गति धीमी किए या रुके बिना अपने-आप टोल का भुगतान कर सकेंगी, जो सीधे FASTag से लिंक होगा।
सरकारी खजाने को फायदा
यह बदलाव न केवल ट्रैफिक सुधारेगा, बल्कि फाइनेंशियल तौर पर भी गेम चेंजर साबित हो सकता है:
- लैंड एक्विजिशन (Land Acquisition): बड़े टोल प्लाजा बनाने के लिए महंगी जमीन की जरूरत पड़ती है, जिसे अब घटाया जा रहा है।
- ऑपरेटिंग लागत: मौजूदा टोल कलेक्शन सिस्टम की लागत 12-15% है, जो इस ऑटोमेटेड सिस्टम से गिरकर 3-4% पर आ सकती है।
लोकल निवासियों के लिए राहत
सरकार ने 1 नवंबर, 2026 से स्थानीय लोगों के लिए नया रियायती पास सिस्टम शुरू किया है। टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले निवासी अपनी लोकेशन के आधार पर ₹1,500 या ₹3,000 के सालाना पास ले सकेंगे।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर्स
हालांकि यह टेक्नोलॉजी कुशल है, लेकिन इसका असर टेक्नोलॉजी की सटीकता पर निर्भर करेगा। अगर कैमरा या RFID में कोई तकनीकी दिक्कत आती है, तो रेवेन्यू लीक हो सकता है। इसके अलावा, कॉन्ट्रैक्टर्स को भी नए डिजाइन्स के हिसाब से खुद को तेजी से ढालना होगा, क्योंकि इन बदलावों का असर आने वाले समय में प्रोजेक्ट इकोनॉमिक्स पर साफ दिखेगा।
