NHAI का बड़ा दांव: हाईवे प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारेगी, कंसल्टेंट्स की सैलरी में भारी बढ़ोतरी!

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AuthorNeha Patil|Published at:
NHAI का बड़ा दांव: हाईवे प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारेगी, कंसल्टेंट्स की सैलरी में भारी बढ़ोतरी!

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने देश भर में चल रहे हाईवे प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अथॉरिटी ने इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स के लिए न्यूनतम सैलरी तय कर दी है, ताकि बेहतर और अनुभवी टैलेंट को आकर्षित किया जा सके और उन्हें बनाए रखा जा सके।

Detailed Coverage

टेक्निकल एक्सपर्ट्स के लिए नई सैलरी-

NHAI ने अपने नए Request for Proposal (RFP) गाइडलाइन्स में कई अहम पदों के लिए मंथली सैलरी की नई सीमा तय की है। इसके तहत, टीम लीडर्स और ब्रिज या स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स को अब हर महीने कम से कम ₹5 लाख मिलेंगे। क्वालिटी-कम-मटेरियल एक्सपर्ट्स, पेमेंट स्पेशलिस्ट और हाईवे इंजीनियर्स जैसे सीनियर रोल्स के लिए यह राशि ₹3.50 लाख प्रति माह होगी। वहीं, रोड सेफ्टी एक्सपर्ट्स को हर महीने न्यूनतम ₹2.50 लाख का भुगतान किया जाएगा। यह कदम प्राइवेट सेक्टर की तर्ज पर सैलरी देकर महत्वपूर्ण टेक्निकल लीडरशिप को प्रोजेक्ट के अंत तक बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

करियर ग्रोथ और सुपरविजन क्वालिटी-

सैलरी बढ़ाने के अलावा, NHAI साइट इंजीनियरिंग स्टाफ के मैनेजमेंट में भी बदलाव कर रहा है। पहले जो 5 साल की टेन्योर कैप थी, उसे हटा दिया गया है। इससे इंजीनियर्स के लिए लॉन्ग-टर्म कंसल्टेंसी पोजीशन्स में जाने का रास्ता साफ हो गया है। अथॉरिटी का मानना है कि इससे टेक्निकल नॉलेज का लॉस कम होगा, जो स्टाफ के बार-बार बदलने से होता है। हाईवे सेक्टर में लगातार सुपरविजन बहुत ज़रूरी है, क्योंकि पिछले बड़े प्रोजेक्ट्स में हाई-प्रोफाइल स्टाफ टर्नओवर की वजह से देरी और लागत बढ़ने की शिकायतें आती रही हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर-

भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर अक्सर टेक्निकल सुपरविजन की कमी और मैनपावर की शॉर्टेज के कारण प्रोजेक्ट में देरी से जूझता रहा है। कंसल्टेंट्स की बढ़ी हुई सैलरी से मैनेजमेंट की एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट तो बढ़ेगी, लेकिन इसका मकसद कंस्ट्रक्शन डिफेक्ट्स और टाइमलाइन स्लिपेज के रिस्क को कम करना है। रोड कंस्ट्रक्शन कंपनियों के इन्वेस्टर्स यह ध्यान दे सकते हैं कि कंसल्टेंट की कॉस्ट प्रोजेक्ट के कुल खर्च का एक हिस्सा है, लेकिन बेहतर सुपरविजन से प्रोजेक्ट्स आसानी से पूरे हो सकते हैं और टाइमलाइन में भी मदद मिलती है। बाजार के लिए मुख्य मॉनिटर यह रहेगा कि क्या ये नए इंसेंटिव्स नेशनल हाईवे नेटवर्क पर प्रोजेक्ट एक्सटेंशन और टेक्निकल बॉटलनेक्स को कम करने में कामयाब होते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.