NHAI प्रोजेक्ट्स पर लगी ब्रेक! बिटुमेन की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने रोकी रफ्तार

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AuthorNeha Patil|Published at:
NHAI प्रोजेक्ट्स पर लगी ब्रेक! बिटुमेन की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने रोकी रफ्तार

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने प्रोजेक्ट्स का दायरा घटाकर **2,442** किलोमीटर कर दिया है। बिटुमेन सप्लाई में आई रुकावट और बढ़ती कीमतों के चलते कंस्ट्रक्शन की रफ्तार **45%** तक गिर गई है।

प्रोजेक्ट पाइपलाइन में बड़ी कटौती

भारत का हाईवे कंस्ट्रक्शन सेक्टर इस समय मंदी के दौर से गुजर रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने प्रोजेक्ट्स के बिडिंग प्लान में बड़ी कटौती की है। अथॉरिटी अब 54 प्रोजेक्ट्स पर बोली लगाएगी, जिनका कुल प्रोजेक्ट एरिया 2,442 किलोमीटर होगा। इनकी अनुमानित वैल्यू ₹1.80 लाख करोड़ है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में एक बड़ा फॉल है, जब 124 प्रोजेक्ट्स, यानी 6,376 किलोमीटर एरिया, करीब ₹3.45 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स अवार्ड किए जाने थे। इस कटौती का मुख्य कारण यह है कि NHAI अब टेंडर शुरू करने से पहले प्रोजेक्ट्स की 80% से 90% लैंड एक्विजिशन सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।

कंस्ट्रक्शन की रफ्तार और सप्लाई चेन में दिक्कतें

PAIMANA डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, इस फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में हाईवे कंस्ट्रक्शन की स्पीड काफी धीमी रही है। पहले दो महीनों में केवल 740 किलोमीटर हाईवे का निर्माण हुआ है, जो पिछले सालों की तुलना में 45% की गिरावट दर्शाता है। कॉन्ट्रैक्टर की क्षमता में कोई कमी नहीं आई है, लेकिन इंडस्ट्री गंभीर सप्लाई चेन की दिक्कतों से जूझ रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण बिटुमेन, जो सड़क निर्माण का एक अहम हिस्सा है, उसके इम्पोर्ट और लॉजिस्टिक्स में भारी रुकावट आई है। इन लॉजिस्टिकल दिक्कतों की वजह से साइट पर काम में देरी हो रही है, क्योंकि बिटुमेन न मिलने से सिविल वर्क का पहला चरण पूरा होने के बावजूद आगे का काम रुक जाता है।

मार्जिन और एग्जीक्यूशन पर असर

सप्लाई में देरी के अलावा, इंडस्ट्री प्राइस वोलेटिलिटी से भी निपट रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी और अप्रैल के बीच मथुरा जैसे रिफाइनरी में बिटुमेन की कीमतों में तेज उछाल आया है। हालांकि सरकार ने इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) प्राइस फॉर्मूले को एडजस्ट करके होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) और बिटुमेन डेटा को बेहतर ढंग से शामिल करने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन कॉन्ट्रैक्टर्स पर दबाव बना हुआ है। CareEdge रेटिंग्स ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए डेली कंस्ट्रक्शन रेट को घटाकर लगभग 21-22 किलोमीटर प्रति दिन रहने का अनुमान लगाया है। कॉन्ट्रैक्टर्स को सपोर्ट करने के लिए, सरकार ने कुछ ऐसे मामलों में फोर्स मेज्योर क्लॉज (force majeure clauses) लागू करने की अनुमति दी है, जहां सप्लाई की समस्या के कारण देरी होना अनिवार्य हो गया था।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

निवेशक यह देख सकते हैं कि NHAI की इस नई बिडिंग स्ट्रेटेजी का असर आने वाली तिमाही में बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के ऑर्डर बुक पर कैसे पड़ता है। इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि कॉन्ट्रैक्टर कॉस्ट इन्फ्लेशन को कैसे मैनेज करते हैं और सरकारी सहायता तंत्र सप्लाई के जोखिमों को कम करने में कितना प्रभावी होता है। भविष्य में परफॉर्मेंस बिटुमेन सप्लाई चेन के हल होने और NHAI द्वारा नए 2,442-किलोमीटर पाइपलाइन के लिए लैंड एक्विजिशन की स्पीड पर निर्भर करेगी। प्रोजेक्ट की तैयारी और कंस्ट्रक्शन वॉल्यूम को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.