भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने कुल कर्ज को ₹3.5 लाख करोड़ के शिखर से घटाकर ₹2 लाख करोड़ से भी कम कर लिया है। यह सुधार एसेट मोनेटाइजेशन (Asset Monetization) में तेजी और सरकारी बजट सपोर्ट में बढ़ोतरी के चलते संभव हुआ है। प्राधिकरण अब चालू वित्त वर्ष में ₹30,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रहा है।
Detailed Coverage
कर्ज़ का बोझ कम, NHAI की मजबूत होती वित्तीय स्थिति
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपनी वित्तीय स्थिति में ज़बरदस्त सुधार करते हुए कुल कर्ज को ₹2 लाख करोड़ से भी नीचे ला दिया है। एक समय, 2021-22 फाइनेंशियल ईयर में, यह कर्ज़ ₹3.5 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। मार्च 2022 के बाद से, NHAI ने ₹1.2 लाख करोड़ से ज़्यादा के लोन का प्रीपेमेंट (Prepayment) किया है और अतिरिक्त ₹31,300 करोड़ चुकाए हैं। यह इसके वित्तीय प्रबंधन में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
सरकारी बजट का बढ़ता सहारा
इस कर्ज़ कटौती में एक बड़ा फैक्टर NHAI के संचालन के लिए फंड जुटाने के तरीके में बदलाव रहा है। 2022-23 फाइनेंशियल ईयर से, प्राधिकरण ने बाज़ार से सीधे कर्ज लेना काफी हद तक बंद कर दिया है। इसके बजाय, उसकी फंडिंग ज़रूरतों को अब सरकारी बजट सपोर्ट के ज़रिए पूरा किया जा रहा है, जिसे केंद्र सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) माना जाता है। इस नीतिगत बदलाव से सरकार का सपोर्ट काफी बढ़ा है। राजमार्ग क्षेत्र के लिए सालाना बजट आवंटन इस साल ₹3.1 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि 2013-14 में यह सिर्फ ₹31,000 करोड़ था।
एसेट मोनेटाइजेशन की शानदार सफलता
सरकारी फंडिंग के साथ-साथ, NHAI ने अपने मौजूदा हाईवे एसेट्स (Assets) को मोनेटाइज करने पर ज़ोर दिया है। तैयार सड़कों को प्राइवेट इनवेस्टर्स (Private Investors) को लीज़ पर देकर, प्राधिकरण कैश जेनरेट करता है और साथ ही ऑपरेशनल जिम्मेदारियों को भी सौंप देता है। अकेले FY24 में, इस रणनीति से रिकॉर्ड ₹41,079 करोड़ की कमाई हुई, जबकि पिछले वर्षों में यह लगभग ₹28,000 से ₹29,000 करोड़ सालाना थी।
NHAI इन डील्स के लिए दो मुख्य मॉडल का इस्तेमाल करता है। टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) मॉडल के तहत, 2018-19 से 3,175 किमी हाईवे को मोनेटाइज करके ₹63,911 करोड़ जुटाए गए हैं। इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) मॉडल से 2,913 किमी रोड एसेट्स पर ₹59,588 करोड़ मिले हैं। ये मॉडल लॉन्ग-टर्म इनवेस्टर्स के बीच काफी लोकप्रिय हैं क्योंकि ये टोल कलेक्शन से स्टेबल रेवेन्यू (Stable Revenue) का मौका देते हैं, जिसमें प्रोजेक्ट का रिस्क (Risk) कम होता है।
आगे की राह और निगरानी
NHAI का लक्ष्य चालू फाइनेंशियल ईयर में एसेट मोनेटाइजेशन से ₹30,000 करोड़ जुटाना है। निवेशकों और बाज़ार पर नज़र रखने वालों के लिए, मुख्य बात यह होगी कि प्राधिकरण हाईवे निर्माण की गति बनाए रखते हुए अपने बाकी कर्ज़ को कम करने में कितना सफल रहता है। सड़कों के क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता इन एसेट मोनेटाइजेशन लक्ष्यों और केंद्र सरकार के बजट आवंटन की निरंतरता से जुड़ी हुई है, जो पिछले वर्षों में बढ़े वित्तीय बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण रहे हैं।
