1 अगस्त से NH-48 का Gurgaon-Jaipur कॉरिडोर पूरी तरह से बैरियर-फ्री होने वाला है। शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम लागू होने के साथ ही, **270** किमी लंबे इस हाईवे पर अब वाहनों को टोल के लिए रुकना नहीं पड़ेगा।
टोल की नई तकनीक: तेज और सुगम यात्रा
1 अगस्त से दिल्ली-जयपुर (NH-48) हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम की शुरुआत के साथ ही यह पूरा 270 किलोमीटर का कॉरिडोर बिना किसी रुकावट के टोल वसूलने वाला बन जाएगा। इसका मतलब है कि अब आपको टोल प्लाजा पर न तो रुकना पड़ेगा और न ही धीमा होना पड़ेगा।
MLFF कैसे काम करता है?
इस नई तकनीक में RFID रीडर्स और हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगे होते हैं। ये FASTag को स्कैन करते हैं और गाड़ी के नंबर प्लेट को पहचानकर अपने आप टोल काट लेते हैं। यह सिस्टम रियल-टाइम में गाड़ी की जानकारी लेता है और तुरंत टोल की रकम वसूल लेता है। शाहजहांपुर प्लाजा के जुड़ने के साथ ही, दौलतपुरा और मनोहरपुरा जैसे टोल प्लाजा भी इसी ऑटोमेटेड सिस्टम का हिस्सा बन गए हैं।
लॉजिस्टिक्स और निवेशकों के लिए क्या है खास?
यह बदलाव लॉजिस्टिक्स कंपनियों और निवेशकों के लिए काफी अहम है। टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम और इंतजार का समय खत्म होने से गाड़ियों के आने-जाने का समय बचेगा, जिससे ईंधन की खपत भी कम होगी। इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) के नेतृत्व में यह पहल सरकारी 'आधुनिकीकरण' का एक बड़ा कदम है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, मार्च 2029 तक 4 लेन या उससे ज़्यादा वाले सभी नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर ऐसी ही टेक्नोलॉजी लागू करने की योजना है।
FASTag ज़रूरी, वरना दोगुना लगेगा टोल
इस नई व्यवस्था में, सभी गाड़ियों के लिए FASTag का होना और उसमें पर्याप्त बैलेंस रखना बहुत ज़रूरी है। जिन गाड़ियों के FASTag में पैसे कम होंगे या वो काम नहीं करेगा, उन्हें 72 घंटे के अंदर टोल की रकम चुकानी होगी, वरना दोगुना फाइन लग सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल 104 टोल प्लाजा पर यह सिस्टम लागू होना बाकी है, जिनकी बिडिंग प्रक्रिया चल रही है। इस रोलआउट की रफ्तार आगे चलकर एक अहम पैमाना होगी। इस कॉरिडोर पर निर्भर रहने वाले व्यावसायिक लोगों को उम्मीद है कि टेक्नोलॉजी के भरोसेमंद रहने और ट्रैफिक के सुचारू रहने पर, लंबे समय में उनके खर्चों में कमी आएगी।
