नए ऑर्डर्स से मिली परिचालन राहत
NCC Ltd ने अप्रैल 2026 में ₹1,703.27 करोड़ के नए ऑर्डर हासिल किए हैं, जो कंपनी की परिचालन क्षमता को दर्शाते हैं। ये ऑर्डर मुख्य रूप से बिल्डिंग्स डिवीजन से ₹929.96 करोड़ और इलेक्ट्रिकल डिवीजन से ₹603.41 करोड़ के हैं। वहीं, ट्रांसपोर्टेशन डिवीजन ने ₹169.90 करोड़ का योगदान दिया। ये ऑर्डर कंपनी के मजबूत ऑर्डर बुक को और बढ़ाते हैं, जो Q3 FY26 तक लगभग ₹79,571 करोड़ था।
NHAI के साथ विवाद का मामला
इन मजबूत ऑर्डर्स के बावजूद, NCC Ltd को NHAI से एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। NHAI ने फरवरी 2026 में एक साल 2006 के उत्तर प्रदेश हाईवे प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में NCC और उसकी सब्सिडियरी OBIL को 2 साल के लिए डिबार करने का आदेश दिया था। यह प्रतिबंध NHAI के उन टेंडर्स में भाग लेने से रोकता है, जो OBIL के पक्ष में गए एक आर्बिट्रेशन अवार्ड को NHAI चुनौती दे रहा है।
हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत
NCC का तर्क है कि इस डिबारमेंट आदेश के लिए उन्हें ठीक से सुनवाई का मौका नहीं मिला। इस बीच, 26 फरवरी, 2026 को तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी कर दिया, जिससे NCC को NHAI के प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने की अनुमति मिल गई है। यह कोर्ट का आदेश फिलहाल कंपनी को बड़ी राहत देता है, लेकिन मुख्य कानूनी विवाद अभी सुलझा नहीं है।
बाजार की प्रतिक्रिया और मूल्यांकन
30 अप्रैल, 2026 को NCC के शेयर 0.39% की गिरावट के साथ ₹163.84 पर बंद हुए। यह सतर्क प्रतिक्रिया NHAI विवाद को लेकर निवेशकों की चिंता को दिखाती है, भले ही कोर्ट से अंतरिम स्टे मिल गया हो। NCC का प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो (P/E Ratio) लगभग 14-17x है, जो इंडस्ट्री एवरेज 53x और प्रतिद्वंद्वी L&T के 33-38x की तुलना में काफी कम है। यह कम वैल्यूएशन रेगुलेटरी रिस्क, कंपनी के कम रिटर्न ऑन इक्विटी (10-11%) और ज्यादा उधार लागत के कारण हो सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का भविष्य
NCC भारत के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है, जिसके 2034 तक 6.87% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट से बढ़ने का अनुमान है। सरकारी खर्च (FY27 के लिए ₹12.2 लाख करोड़ की योजना) इस ग्रोथ को बढ़ावा देगा। हालांकि NCC के अप्रैल के ऑर्डर ₹1,703 करोड़ थे, लेकिन उसकी कुल ऑर्डर बुक उसे प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल करती है। L&T जैसी कंपनियों के पास बड़ी ऑर्डर बुक और उच्च मूल्यांकन हैं। PNC Infratech प्रोजेक्ट में देरी से जूझ रही है, और KNR Constructions को कार्यान्वयन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। NHAI विवाद के बावजूद, NCC की विविध ऑर्डर बुक, यदि विवाद अनुकूल रूप से सुलझता है, तो साथियों की तुलना में अधिक स्थिर दृष्टिकोण प्रदान कर सकती है।
जोखिम और आगे की राह
NHAI डिबारमेंट पर कोर्ट का अंतरिम स्टे केवल एक अस्थायी समाधान है, पक्की राहत नहीं। NHAI जैसे बड़े क्लाइंट के साथ कानूनी लड़ाई जारी रहना एक महत्वपूर्ण बिजनेस रिस्क है। यदि स्टे रद्द हो जाता है या पेनल्टी लगाई जाती है, तो NCC को भविष्य में प्रोजेक्ट्स, खासकर ट्रांसपोर्टेशन में (₹169.90 करोड़ के कम अप्रैल ऑर्डर), हासिल करने में दिक्कत हो सकती है। भूमि अधिग्रहण और NHAI द्वारा कथित उल्लंघनों पर विवाद कंपनी और क्लाइंट के बीच मुश्किल रिश्ते को दर्शाते हैं। NCC की मौजूदा वित्तीय चुनौतियां, जैसे कम रिटर्न ऑन इक्विटी और उच्च उधार लागत, लंबी कानूनी लड़ाई या NHAI प्रोजेक्ट्स से कम राजस्व के साथ और बढ़ सकती हैं।
एनालिस्ट्स की राय
ज्यादातर एनालिस्ट्स का नजरिया पॉजिटिव है, और वे 'Buy' की सलाह दे रहे हैं, जिनका प्राइस टारगेट ₹199-₹205 के बीच है। वे FY27 में अर्निंग्स में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। यह आशावाद NCC की विविध ऑर्डर बुक और बेहतर प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन पर निर्भर करता है। हालांकि, इन लक्ष्यों को प्राप्त करने और सेक्टर की ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए NHAI के साथ जारी कानूनी विवादों का समाधान महत्वपूर्ण होगा।
