Adani ग्रुप द्वारा संचालित Mumbai International Airport ने टर्मिनल 1 के पुनर्विकास के लिए इंटरनेशनल फ्लाइट स्लॉट्स में **33%** की कटौती का प्रस्ताव दिया है। इस फैसले के खिलाफ बड़ी एयरलाइंस और IATA लामबंद हो गए हैं, जिसे सुलझाने के लिए **6 अक्टूबर** को सरकार ने आपातकालीन बैठक बुलाई है।
विवाद की जड़ क्या है?
Mumbai International Airport Ltd (MIAL) ने 25 अक्टूबर 2026 से टर्मिनल 2 पर इंटरनेशनल फ्लाइट्स के स्लॉट्स में 33% कमी करने का निर्देश दिया है। इसके पीछे मुख्य कारण टर्मिनल 1 का रिडेवलपमेंट है, जो 60 साल पुरानी इमारत होने के चलते सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो गया है।
एयरलाइंस का रुख और सरकार की मध्यस्थता
IndiGo, Air India, Akasa Air, Air India Express और SpiceJet जैसी घरेलू कंपनियां, साथ ही Emirates और Etihad जैसी विदेशी एयरलाइंस इस फैसले को 'जबरन स्थानांतरण' मान रही हैं। उनका तर्क है कि स्लॉट का फैसला मार्केट डिमांड के आधार पर होना चाहिए, न कि रेगुलेटरी आदेशों से।
स्थिति को देखते हुए, सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने 6 अक्टूबर 2026 को एक हाई-लेवल बैठक बुलाई है। अगर सहमति नहीं बनी, तो एयरपोर्ट ऑपरेटर अपनी मर्जी से स्लॉट्स तय कर सकता है, जिससे एयरलाइंस को अपना ऐतिहासिक स्लॉट अधिकार खोने का डर है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश का पहलू
MIAL ने एयरलाइंस को Navi Mumbai International Airport पर शिफ्ट होने के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से लैंडिंग चार्जेस पर 100% छूट की पेशकश की है। यह पूरी योजना कंपनी के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार का हिस्सा है, जिसे हाल ही में ₹9,825 करोड़ (लगभग $1 बिलियन) की इक्विटी जुटाकर और $18 बिलियन की वैल्यूएशन हासिल करके गति दी गई है।
इन्वेस्टर्स के लिए, यह विवाद एक बड़ा रिस्क फैक्टर है। अगर एयरलाइंस और ऑपरेटर के बीच सहमति नहीं बनती है, तो यह कानूनी विवादों में बदल सकता है, जो एयरपोर्ट के ऑपरेशंस और भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।
