भारत और जापान ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए स्वदेशी बुलेट ट्रेनों और ओपन-सोर्स सिग्नलिंग सिस्टम के इस्तेमाल का फैसला किया है। जापान के सप्लायर्स द्वारा 2027 की समय-सीमा को लेकर आई दिक्कतों के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। हालांकि, प्रोजेक्ट में जापान का सहयोग और निगरानी जारी रहेगी ताकि सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों से कोई समझौता न हो।
प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव
भारत और जापान के बीच चल रही मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना एक बड़ी रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रही है। अब इस प्रोजेक्ट में स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। दोनों देशों के अधिकारियों ने मिलकर तय किया है कि अब भारत में बनी बुलेट ट्रेनों और ओपन-सोर्स सिग्नलिंग सिस्टम का प्रयोग किया जाएगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि जापान के सप्लायर्स 2027 तक सूरत-वापी सेक्शन को चालू करने की समय-सीमा पूरी नहीं कर पा रहे थे।
प्रोजेक्ट की समय-सीमा और संचालन पर असर
रेल मंत्रालय का लक्ष्य इसी साल सूरत-वापी स्ट्रेच का सिविल वर्क पूरा करना है। स्वदेशी तकनीक पर आने से भारत अपनी हाई-स्पीड ट्रेन का टेस्ट 2027 के मध्य तक करने की योजना बना रहा है। देश की पहली हाई-स्पीड रेल सेवा अगस्त 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य है। भले ही तकनीक का स्रोत बदल रहा हो, लेकिन जापान के विशेषज्ञ निर्माण, डिजाइन अप्रूवल और क्वालिटी कंट्रोल में अपनी निगरानी जारी रखेंगे। यह वही सुरक्षा मानक हैं जो प्रोजेक्ट की शुरुआत 2021 में तय किए गए थे।
नई तकनीक और बातचीत का संदर्भ
सिग्नलिंग तकनीक का चुनाव इस बदलाव का एक अहम हिस्सा है। कुछ सप्लायर्स जापान के अपने 'डिजिटल सिंपलीफाइड ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल (DS-ATC)' सिस्टम की जगह ओपन-सोर्स सिग्नलिंग प्रोटोकॉल को प्राथमिकता दे रहे थे। इंटरऑपरेबल सिस्टम अपनाने से प्रोजेक्ट को किसी एक प्रोप्राइटरी फ्रेमवर्क पर निर्भर रहने से बचाया जा सकेगा, जिससे भविष्य में निर्माण और रखरखाव में देरी से बचा जा सकेगा। इस कदम से ट्रेनसेट और ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर जैसी महत्वपूर्ण चीजों की लीड-टाइम संबंधी चिंताओं को भी दूर किया जाएगा, जो 2027 की डेडलाइन को पूरा करने के लिए जरूरी हैं।
हाल ही में, एक पूर्व जापानी मंत्री की बातचीत की जटिलताओं और प्रोजेक्ट की समय-सीमा पर कुछ खबरें आई थीं। हालांकि, विदेश मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जापानी मंत्रालयों और भारतीय अधिकारियों के बीच उच्च-स्तरीय समन्वय सहयोगपूर्ण और जारी है। निवेशकों को सूरत-वापी क्षेत्र में चल रहे सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर के काम की प्रगति और स्वदेशी ट्रेनसेट के परीक्षण चरणों पर नजर रखनी चाहिए। जापानी निगरानी में भारतीय तकनीक का सफल एकीकरण इस कॉरिडोर के लिए अगला बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
