Setelah Motilal Oswal ने Delhivery पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹570 का टारगेट प्राइस दिया है, कंपनी के नतीजों ने निवेशकों को थोड़ा झटका दिया है। लॉजिस्टिक्स कंपनी ने Q1 FY27 में रेवेन्यू तो **28%** बढ़ाया, लेकिन लागत बढ़ने से नेट प्रॉफिट **65%** गिर गया।
Motilal Oswal की राय: 'Buy' रेटिंग और ₹570 का लक्ष्य
ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने लॉजिस्टिक्स कंपनी Delhivery पर अपना भरोसा जताया है। फर्म ने स्टॉक पर 'Buy' रेटिंग को बरकरार रखा है और भविष्य में इसके ₹570 तक जाने का अनुमान लगाया है। यह लक्ष्य कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ संभावनाओं को देखते हुए दिया गया है।
नतीजों पर एक नज़र: रेवेन्यू में उछाल, मुनाफे में गिरावट
वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में Delhivery का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कंपनी का रेवेन्यू साल-दर-साल 28% बढ़कर ₹2,931 करोड़ पर पहुंच गया। इस उछाल का मुख्य कारण एक्सप्रेस पार्सल शिपमेंट में 55% की वृद्धि रही, जो 322 मिलियन पैकेज तक पहुंच गया।
हालांकि, रेवेन्यू में इस शानदार ग्रोथ के बावजूद, कंपनी का नेट प्रॉफिट 65% घटकर सिर्फ ₹32 करोड़ रह गया। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में यह गिरावट काफी बड़ी है।
मुनाफे में गिरावट के पीछे क्या है?
मुनाफे में इस बड़ी गिरावट की वजह कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ा दबाव है। मार्जिन 4.9% से 5.3% के बीच सिमट गए। फर्म और कंपनी मैनेजमेंट ने इसके लिए कई कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:
- बढ़ी हुई लेबर कॉस्ट: चुनाव के चलते श्रमिकों की उपलब्धता और वेतन में हुए संशोधन से लागत बढ़ी।
- ईंधन की ऊंची कीमतें: ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और इसे ग्राहकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में देरी से अतिरिक्त खर्च हुआ।
- Ecom Express का अधिग्रहण: Ecom Express के अधिग्रहण से जुड़ी इंटीग्रेशन की लागतें भी मुनाफे पर भारी पड़ीं।
कंपनी के उठाए कदम और आगे की राह
इन चुनौतियों से निपटने के लिए Delhivery ने लागतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं। कंपनी ने 97-98% शिपिंग वॉल्यूम को कवर करने वाले फ्यूल कॉन्ट्रैक्ट्स पर फिर से बातचीत की है, ताकि भविष्य में ईंधन की कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम हो सके। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि लागत प्रबंधन के इन उपायों और अधिग्रहण से जुड़ी लागतों के कम होने पर मार्जिन में सुधार देखने को मिलेगा।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
विश्लेषकों ने कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है। हाल ही में कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) Ajith Pai ने इस्तीफा दिया है। ऐसे में, यह देखना अहम होगा कि कंपनी परिचालन लागतों को प्रभावी ढंग से कैसे प्रबंधित करती है, जबकि वॉल्यूम ग्रोथ की रफ्तार को बनाए रखना भी एक चुनौती होगी। बाज़ार की नज़रें अगले वित्तीय अपडेट पर रहेंगी कि क्या मार्जिन में सुधार का वादा पूरा होता है।
