गुजरात में नई रेल परियोजनाओं का बड़ा ऐलान
प्रधानमंत्री मोदी जिन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उनमें 55 किलोमीटर लंबी हिम्मतनगर-खेड़ब्रह्मा नई लाइन शामिल है, जिस पर ₹482 करोड़ खर्च हुए हैं। इसका मकसद साबरकांठा जिले की कनेक्टिविटी सुधारना है। इसके अलावा, कनालस-जामनगर डबलिंग प्रोजेक्ट (27 किमी, ₹257 करोड़) और गांधीधाम-आदिपुर मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट (11 किमी, ₹152 करोड़) से माल ढुलाई (freight operations) आसान होगी और दीनदयाल पोर्ट जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर होगी। एक नई ट्रेन सेवा भी खेड़ब्रह्मा से अहमदाबाद के बीच शुरू की जाएगी, जो दैनिक यात्रा को सुगम बनाएगी।
देश के इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान का अहम हिस्सा
यह सब भारत के रेलवे आधुनिकीकरण (modernization) और लॉजिस्टिक्स लागत (logistics costs) कम करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। भारतीय रेलवे में कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) लगातार बढ़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए ₹2,77,830 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो बुनियादी ढांचे (infrastructure) में बड़े निवेश को दर्शाता है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFCs) इस रणनीति के अहम हिस्से हैं, जिनसे मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को अलग कर के ट्रांजिट (transit) को तेज़ किया जा सके।
निवेश का बढ़ता ट्रेंड और नेटवर्क में सुधार
पिछले दशक में भारतीय रेलवे के लगातार कैपिटल खर्च से नेटवर्क में ज़बरदस्त सुधार हुआ है। ब्रॉड-गेज नेटवर्क का 99% से अधिक विद्युतीकरण (electrification) हो चुका है। गुजरात रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (G-RIDE), जो राज्य और भारतीय रेलवे का एक संयुक्त उद्यम (joint venture) है, राज्य के रेल ढांचे को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
चुनौतियां और सेक्टर के जोखिम
हालांकि, इन बड़े निवेशों के बावजूद, रेलवे क्षेत्र में चुनौतियां बनी हुई हैं। दुर्घटनाएं, लागत का बढ़ना और प्रोजेक्ट में देरी जैसी समस्याएं अभी भी मौजूद हैं। पिछले साल Groww Nifty India Railways PSU Index Fund ने -19.49% का नकारात्मक रिटर्न (return) दिया था, जो सेक्टर के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।