MoRTH का बड़ा फैसला: हाईवे प्रोजेक्ट्स के कंसल्टेंट्स के लिए बदले नियम, क्वालिटी में सुधार की तैयारी

TRANSPORTATION
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
MoRTH का बड़ा फैसला: हाईवे प्रोजेक्ट्स के कंसल्टेंट्स के लिए बदले नियम, क्वालिटी में सुधार की तैयारी

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बनाने वाले कंसल्टेंट्स के लिए मूल्यांकन ढांचे में बदलाव किया है। अब लीड और एसोसिएट फर्मों की रेटिंग में स्पष्ट अंतर होगा, जिसका मकसद प्रोजेक्ट की ब्लूप्रिंट की क्वालिटी सुधारना और निर्माण में देरी को कम करना है।

क्यों बदले गए नियम?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने वाले कंसल्टेंट्स के लिए परफॉरमेंस मूल्यांकन के नियमों को और सख्त कर दिया है। ये रिपोर्ट किसी भी सड़क प्रोजेक्ट की नींव होती हैं, जिसमें इंजीनियरिंग डिजाइन, ट्रैफिक सर्वे, जमीन की जरूरत और पर्यावरण प्रभाव जैसे अहम विवरण शामिल होते हैं। मंत्रालय ने रेटिंग नियमों में यह बदलाव इसलिए किया है ताकि हाईवे सेक्टर में अक्सर होने वाली प्रोजेक्ट में देरी और लागत बढ़ने की समस्या से निपटा जा सके।

नई रेटिंग प्रणाली का असर

पहले, लीड कंसल्टेंट और उनके एसोसिएट पार्टनर्स को अक्सर एक जैसी रेटिंग मिलती थी, जिससे हर फर्म के असली योगदान का पता नहीं चल पाता था। नए ढांचे में, जिम्मेदारियों का बंटवारा स्पष्ट किया गया है। अब एसोसिएट फर्मों को लीड कंसल्टेंट या ज्वाइंट वेंचर पार्टनर को मिली रेटिंग का 75% ही मिलेगा। इसके अलावा, इन रेटिंग्स को अलग से पब्लिश किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्मों को अपने हिस्से के प्लानिंग वर्क के लिए जवाबदेह ठहराया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटी फर्मों सिर्फ बड़े लीड कंसल्टेंट्स की गुडविल पर निर्भर न रहें, बल्कि खुद की मजबूत टेक्निकल काबिलियत विकसित करें।

सेक्टर पर पड़ने वाला प्रभाव

यह नीतिगत बदलाव हाईवे सेक्टर के हालिया प्रदर्शन को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण है। नए प्रोजेक्ट्स को अवार्ड करने की रफ्तार काफी धीमी हो गई है, जो FY22-23 में 12,376 किमी से घटकर FY25 में लगभग 7,538 किमी और FY26 में करीब 7,000 किमी रह गई है। यह पिछले सात सालों में सबसे कम है। इतना ही नहीं, मार्च 2026 तक, लगभग 80 हाईवे प्रोजेक्ट्स में तीन साल से ज्यादा की देरी चल रही थी। MoRTH ने इन रुकावटों के लिए घटिया DPRs को एक मुख्य कारण माना है, क्योंकि शुरुआती स्टेज में गलत प्लानिंग के कारण बाद में अलाइनमेंट में बदलाव, अप्रत्याशित जमीन अधिग्रहण की जरूरतें और डिजाइन में संशोधन जैसी समस्याएं आती हैं।

कुल मिलाकर, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कंसल्टिंग सेक्टर के लिए यह बदलाव बेहतर ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स की ओर एक कदम है। हालांकि नए नियमों से फर्मों पर अनुपालन और चयन का दबाव बढ़ सकता है, मंत्रालय को उम्मीद है कि DPR स्टेज पर बेहतर प्लानिंग से अंततः प्रोजेक्ट का एग्जीक्यूशन आसान होगा, कॉन्ट्रैक्ट संबंधी विवाद कम होंगे और हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय कुशलता बढ़ेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेस के निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को यह देखना होगा कि क्या ये बेहतर रेटिंग नियम आने वाली तिमाहियों में प्रोजेक्ट अवार्ड नंबर्स में रिकवरी और लंबे समय से अटके निर्माण में देरी में कमी ला पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.