सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) ने नेशनल हाईवे कॉरिडोर के लिए एक नई रेटिंग सिस्टम की शुरुआत की है। इसके तहत सड़कों की सुरक्षा, कार्यक्षमता और यूजर अनुभव का आकलन किया जाएगा, जिससे इंफ्रा सेक्टर की जवाबदेही बढ़ेगी।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने भारत के नेशनल हाईवे के लिए एक नया परफॉरमेंस असेसमेंट फ्रेमवर्क तैयार किया है। इस रेटिंग सिस्टम का मुख्य उद्देश्य प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता को केवल निर्माण की गति तक सीमित न रखकर, लंबे समय तक चलने वाले रोड क्वालिटी और मेंटेनेंस पर केंद्रित करना है।
रेटिंग के मुख्य मानक
नए फ्रेमवर्क के तहत हाईवे कॉरिडोर को 3 प्रमुख मापदंडों पर परखा जाएगा:
- ऑपरेशनल एफिशिएंसी: टोल प्लाजा का कामकाज और ट्रैफिक मैनेजमेंट।
- पब्लिक सेफ्टी: दुर्घटनाओं की गंभीरता और 10 किलोमीटर के दायरे में होने वाली मौतों का इंडेक्स।
- यूजर अनुभव: सड़कों की मजबूती और मिलने वाली सुविधाएं।
इंफ्रा कंपनियों पर असर
EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) और HAM (हाइब्रिड एन्युटी मॉडल) के तहत काम करने वाली कंपनियों के लिए यह बड़ा बदलाव है। अब कंपनियों को अपनी क्वालिटी कंट्रोल प्रक्रियाओं को इन नए बेंचमार्क के अनुसार ढालना होगा। बेहतर रेटिंग का सीधा असर भविष्य में मिलने वाले सरकारी टेंडर्स और कॉन्ट्रैक्ट्स पर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
हालांकि यह कदम हाईवे मैनेजमेंट को दुरुस्त करने के लिए 'गति शक्ति' (Gati Shakti) पहल का हिस्सा है, लेकिन डेवलपर्स के लिए लागत का दबाव बढ़ सकता है। खराब रोड कंडीशन के लिए पेनल्टी और सख्त मेंटेनेंस नियमों के कारण कंपनियों को अपनी पूंजी का बड़ा हिस्सा मेंटेनेंस और रिपेयर्स पर लगाना होगा। निवेशकों को अब पहली आधिकारिक रैंकिंग रिपोर्ट और सरकार की नई नीतिगत घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।
