मिडिल ईस्ट संकट का सीधा असर: उड़ानों पर रोक, स्टॉक्स पर भारी झटका
मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक संकट का असर अब सीधा हवाई यात्रा पर पड़ रहा है। ईरान, इज़राइल, कतर, बहरीन और यूएई जैसे देशों के एयरस्पेस बंद होने से हजारों फ्लाइट्स या तो रद्द हो गई हैं या फिर उनमें भारी देरी हो रही है। इस हंगामे ने एविएशन सेक्टर की कमर तोड़ दी है, खासकर उन एयरलाइंस के लिए जो इस रूट पर काफी निर्भर हैं।
एयरस्पेस बंद होने से 3,000 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द, 18,000 से ज्यादा लेट
खबरों के मुताबिक, मंगलवार सुबह तक दुनिया भर में 3,000 से ज़्यादा फ्लाइट्स रद्द हुईं और 18,000 से ज़्यादा लेट हुईं। इस वजह से ट्रैवल सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली। भारतीय एयरलाइन InterGlobe Aviation (IndiGo) के शेयर में इंट्राडे में 7.58% तक की गिरावट आई, जबकि SpiceJet के शेयर 7% से ज़्यादा गिरे। वहीं, क्रूड ऑयल की कीमतों में 10-13% का उछाल आया, जिससे ब्रेंट क्रूड $82 प्रति बैरल के पार चला गया। यह सीधा असर एयरलाइंस पर पड़ेगा, क्योंकि ईंधन (Fuel) उनके ऑपरेटिंग खर्चों का एक बड़ा हिस्सा होता है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि ब्रेंट क्रूड में हर $5 प्रति बैरल की बढ़ोतरी IndiGo के प्रति शेयर आय (EPS) को करीब 13% तक घटा सकती है, अगर टिकट की कीमतें नहीं बढ़ाई गईं।
भारतीय एयरलाइंस की कमजोरियाँ उजागर
यह संकट एविएशन सेक्टर की भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करता है। भारतीय एयरलाइंस खासतौर पर मिडिल ईस्ट रूट पर अपनी निर्भरता के कारण ज़्यादा प्रभावित हुई हैं। IndiGo के 41% इंटरनेशनल शेड्यूल पर असर पड़ा है, Air India Express के 60% पर, और SpiceJet के पूरे मार्च के इंटरनेशनल शेड्यूल पर।
SpiceJet, जो पहले से ही नेगेटिव अर्निंग्स और 1.60 के बड़े डेट-टू-इक्विटी रेशियो से जूझ रही है, लंबी रुकावटों के प्रति बहुत ज़्यादा संवेदनशील है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो -3.16 है, जो इसके लगातार नुकसान को दर्शाता है।
मार्केट लीडर IndiGo, जो डोमेस्टिक मार्केट में मज़बूत पकड़ और ₹50,000 करोड़ से ज़्यादा के कैश बैलेंस के साथ है, फिर भी बढ़ी हुई ऑपरेशनल कॉस्ट और फेयर एडजस्टमेंट के कारण मार्जिन में कमी का सामना कर सकती है। IndiGo का P/E रेशियो 42.4x है, जो इसके पीयर्स (Average 26.2x) की तुलना में महंगा माना जा रहा है। नई एंट्री Akasa Air भी फाइनेंसियल चुनौतियों का सामना कर रही है, भले ही उसने अतिरिक्त फंडिंग सुरक्षित कर ली हो।
ग्लोबली, IATA का अनुमान है कि 2026 में एयरलाइन इंडस्ट्री का प्रॉफिट मार्जिन सिर्फ 3.9% रहेगा, जो इस तरह के भू-राजनीतिक उथल-पुथल से खतरे में पड़ सकता है।
कर्ज़ और लागत का दोहरा झटका
मिडिल ईस्ट के ये एयर कॉरिडोर, जो भारतीय एयरलाइंस के लिए पहले से ही हाई-यील्ड रूट थे, इस तिमाही में इंटरनेशनल पैसेंजर यील्ड को कम कर सकते हैं। बढ़ी हुई फ्यूल कॉस्ट और ऑपरेशनल इनएफिशिएंसी के साथ, अगर संकट लंबा चला तो मार्जिन पर गंभीर असर पड़ेगा। SpiceJet अपनी नेगेटिव P/E रेशियो और कर्ज़ के कारण मुश्किल में है। कंपनी ने पिछले तीन सालों में कमजोर रेवेन्यू ग्रोथ और नेगेटिव कैश फ्लो फ्रॉम ऑपरेशंस दिखाया है।
Akasa Air, जो अभी शुरुआती दौर में है, बड़े कैश लॉस के साथ काम कर रही है। यह स्थिति भारत के एविएशन मार्केट के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ प्लान को भी धीमा कर सकती है। IATA ने 2025 में नई एयरलाइन स्टार्ट-अप्स में भी मंदी देखी, जो सेक्टर की बढ़ती फाइनेंसियल नाजुकता को दर्शाता है।
आगे की राह: अनिश्चितता के बादल
हालांकि, भविष्य अनिश्चितता से भरा है, IATA ने पहले जनवरी 2026 तक ग्लोबल एयर पैसेंजर डिमांड में 3.8% की ग्रोथ का अनुमान लगाया था। भारत में लॉन्ग-टर्म एयर ट्रैवल की डिमांड मजबूत बनी हुई है, 2025 में ट्रैफिक 9% बढ़ा था। लेकिन मौजूदा संकट से छोटी अवधि में बड़ी बाधाएं आ सकती हैं।
एनालिस्ट्स IndiGo के लिए अभी भी पॉजिटिव आउटलुक रख रहे हैं, ज़्यादातर 'Buy' की सलाह दे रहे हैं, हालांकि वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं हैं। यह देखना अहम होगा कि एयरलाइंस बढ़ी हुई फ्यूल कॉस्ट को कैसे झेल पाती हैं, ऑपरेशनल दिक्कतों को कैसे मैनेज करती हैं और अपने नेटवर्क को कैसे एडजस्ट करती हैं। मिडिल ईस्ट संकट का जल्दी समाधान होने से स्थिति सामान्य हो सकती है, वरना सभी के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल बना रहेगा।