मध्य पूर्व में जियोपॉलिटिकल तनाव की वजह से ग्लोबल एविएशन के लिए एक गहरा संकट खड़ा हो गया है। 3 मार्च 2026 तक, कतर, यूएई, सऊदी अरब, ईरान, इराक, इज़राइल, सीरिया और बहरीन जैसे कई देशों का एयरस्पेस या तो पूरी तरह बंद है या फिर उस पर गंभीर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। इसके चलते हर दिन हज़ारों फ्लाइट्स कैंसिल हो रही हैं और अकेले कतर में करीब 8,000 पैसेंजर्स फंस गए हैं। पूरे क्षेत्र में हज़ारों की संख्या में लोग प्रभावित हैं। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB), हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DOH) और ज़ायेद इंटरनेशनल एयरपोर्ट (AUH) जैसे बड़े इंटरनेशनल हब्स पर अभूतपूर्व ऑपरेशनल पैरालिसिस देखा जा रहा है, जो ग्लोबल ट्रांजिट पॉइंट्स के तौर पर उनकी भूमिका को प्रभावित कर रहा है।
इसका सीधा असर फ्लाइट कैंसलेशन और बड़े ऑपरेशनल एडजस्टमेंट्स के रूप में सामने आया है। Emirates और Etihad जैसी एयरलाइन्स ने अपनी ज़्यादातर शेड्यूल्ड कमर्शियल ऑपरेशंस सस्पेंड कर दी हैं, केवल सीमित रिपेट्रिएशन और फ्रेटर फ्लाइट्स ही चला रही हैं। Qatar Airways एयरस्पेस क्लीयरेंस का इंतज़ार कर रही है और अगली अपडेट 4 मार्च को देगी। फ्लाइट्स को अल्टरनेटिव, अक्सर लंबे और ज़्यादा फ्यूल-इंटेंसिव रास्तों से रीरूट करने की ज़रूरत पड़ रही है। यह सिर्फ असुविधा की बात नहीं है, बल्कि एयरलाइन्स के लिए एक बड़ा फाइनेंशियल स्ट्रेन है, जो पहले से ही तंग मार्जिन्स को और भी मुश्किल बना रहा है और कंज्यूमर्स के लिए टिकट प्राइस बढ़ा सकता है। EU एविएशन सेफ्टी एजेंसी ने इस क्षेत्र में सिविल एविएशन के लिए 'हाई रिस्क' घोषित किया है।
इस बड़े डिसरप्शन से कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन के बाहर की एयरलाइन्स को फायदा होने की उम्मीद है। तुर्की की Turkish Airlines, जिसका हब प्रभावित क्षेत्र से बाहर है, को शॉर्ट-टर्म में बड़ा बेनिफिशियरी माना जा रहा है। इसके अलावा, सऊदी अरब और भारत उभरते हुए ट्रांजिट पॉइंट्स के तौर पर सामने आ रहे हैं। भारतीय एयरलाइन्स जैसे IndiGo और SpiceJet रिपेट्रिएशन प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल हैं और साथ ही रेस्टोर्ड कनेक्टिविटी का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं। इस बीच, ऑयल प्राइस में भी तेज़ी आई है, ब्रेंट क्रूड लगभग $78-$79 प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर जेट फ्यूल कॉस्ट पर पड़ेगा, जो एयरलाइन्स का एक बड़ा ऑपरेशनल एक्सपेंस है। भले ही कुछ एयरलाइन्स के पास फ्यूल हेजिंग स्ट्रेटेजीज़ हों, लेकिन ऑयल प्राइस में लगातार बढ़ोतरी प्रॉफिटेबिलिटी के लिए एक बड़ा खतरा है, खासकर उन एयरलाइन्स के लिए जिनकी फाइनेंशियल स्टैंडिंग कमज़ोर है। एनालिस्ट्स का कहना है कि इस बढ़ते तनाव के बीच एविएशन सेक्टर के ट्रैवल शेयर्स में भारी गिरावट आई है।
भारत की IndiGo और SpiceJet जैसी पब्लिकली ट्रेडेड एयरलाइन्स के लिए, यह स्थिति उनकी अंदरूनी वल्नरेबिलिटीज को उजागर करती है। SpiceJet, जिसका नेगेटिव P/E रेश्यो (नुकसान का संकेत) और 1.60 का हाई डेट-टू-इक्विटी रेश्यो है, उसे बड़े फाइनेंशियल हेडविंड्स का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी की ख़राब रेवेन्यू ग्रोथ और नेगेटिव कैश फ़्लोज़ इन चिंताओं को और बढ़ाते हैं। IndiGo, एक बड़ी कंपनी होने के बावजूद, उसका P/E रेश्यो (लगभग 42-60) काफी हाई है, जो भविष्य में बड़ी ग्रोथ का संकेत देता है। हालांकि, सस्टेन्ड ऑपरेशनल डिसरप्शन और बढ़ती कॉस्ट्स इस वैल्यूएशन को चुनौती दे सकती हैं। दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे प्रमुख खाड़ी हब्स के लिए ट्रांजिट ट्रैफिक पर निर्भरता का मतलब है कि लंबे समय तक एयरस्पेस बंद रहने से पैसेंजर रूटिंग प्रेफरेंसेस स्थायी रूप से बदल सकती हैं, जिससे डायरेक्ट फ्लाइट्स और इमर्जिंग हब्स को फायदा हो सकता है। इसके अलावा, कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन के आसपास ऑपरेट करने के लिए इंश्योरेंस कॉस्ट भी एक बढ़ता हुआ चैलेंज है।
हालांकि एविएशन इंडस्ट्री एनालिस्ट्स का मानना है कि जब तक यह संघर्ष खत्म नहीं हो जाता, तब तक रिकवरी की उम्मीद मुश्किल है। संघर्ष की अवधि और इन्फ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की सीमा अभी भी महत्वपूर्ण वेरिएबल्स हैं। इस बीच, प्रभावित एयरलाइन्स को कॉम्प्लेक्स रीरूटिंग, पैसेंजर रीबुकिंग्स और रिफंड्स को मैनेज करना होगा, साथ ही बदलते एयरस्पेस स्टेटस पर भी नज़र रखनी होगी। यह संकट ग्लोबल ट्रैवल नेटवर्क्स की इंटरकनेक्टेड फ्रैजिलिटी को उजागर करता है और उन एयरलाइन्स और हब्स के स्ट्रैटेजिक एडवांटेजेस को दिखाता है जो वोलेटाइल जियोपॉलिटिकल रीजन्स पर कम निर्भर हैं। पैसेंजर कॉन्फिडेंस पर पड़ने वाले असर और स्टेबल फ्यूल प्राइस को लेकर जारी खतरे इस सेक्टर की रिकवरी ट्रैजेक्टरी को तय करेंगे।
