Black Sea और Strait of Hormuz में चल रहे जियो-पॉलिटिकल संघर्ष के कारण अब तक **16** भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। अब तक **4,232** नाविकों की सुरक्षित घर वापसी हो चुकी है, लेकिन लगातार बढ़ती असुरक्षा ग्लोबल ट्रेड रूट्स के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।
संकट और हताहतों का आंकड़ा
शिपिंग सेक्रेटरी की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत से ब्लैक सी और हॉर्मुज की जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी संघर्ष ने हालात काफी नाजुक बना दिए हैं। व्यावसायिक जहाजों पर लगातार हमलों के कारण 16 भारतीय नाविकों ने अपनी जान गंवाई है। सरकार ने युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से 4,232 नागरिकों को सुरक्षित वापस बुलाने का काम पूरा कर लिया है, लेकिन समुद्री मार्ग अब भी बेहद अस्थिर हैं।
भारत के लिए आर्थिक चुनौतियां
दुनिया भर में भारत का बड़ा समुद्री कार्यबल मौजूद है, जिसमें 3,11,000 से अधिक पेशेवर भारतीय नाविक शामिल हैं। 'MT On Peace', 'MV Royad Mammadov' और 'MV ABLE' जैसे जहाजों पर हुए हालिया हमलों ने चिंता बढ़ा दी है।
निवेशकों के नजरिए से देखें तो, हॉर्मुज का इलाका ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वहां अस्थिरता बढ़ने से शिपिंग कंपनियों पर 'वॉर-रिस्क इंश्योरेंस' का प्रीमियम बढ़ जाता है। यह लागत अंततः फ्रेट रेट्स में बढ़ोतरी के जरिए एक्सपोर्टर्स और इम्पोर्टर्स पर पड़ती है। भारत एक बड़ा एनर्जी आयातक देश है, ऐसे में शिपिंग लागत का बढ़ना देश के इंपोर्ट बिल और सप्लाई चेन पर सीधा दबाव डाल सकता है।
सेक्टर पर असर और चेतावनी
शिपिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए यह समय काफी अनिश्चितता वाला है। सुरक्षा के बढ़ते खर्च और जहाजों के पकड़े जाने या नुकसान की आशंका का असर कंपनियों के रेवेन्यू पर पड़ सकता है। फिलहाल निवेशक इन बातों पर नजर रखें:
- ग्लोबल फ्रेट रेट इंडेक्स में हलचल
- कमर्शियल जहाजों के लिए वॉर-रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम
- हॉर्मुज से एनर्जी ट्रांजिट में आने वाली बाधाएं
डिप्लोमैटिक स्तर पर सरकार सीजफायर फ्रेमवर्क को लेकर कोशिशें कर रही है, लेकिन समुद्री रास्तों के सामान्य होने में अभी वक्त लग सकता है।
