मणिपुर में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के चलते ज़रूरी सामानों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो गई है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर देरी और बढ़ते खर्चों के कारण, खाने-पीने की चीज़ों से लेकर कंस्ट्रक्शन मटेरियल तक सब कुछ महंगा हो गया है।
ट्रांसपोर्टरों का बुरा हाल, रूटों से कतरा रहे
देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में इस वक्त सप्लाई चेन (Supply Chain) पूरी तरह चरमरा गई है। नेशनल हाइवे 2 और 37 पर लगातार हो रही देरी और बढ़ते खर्चों के चलते ट्रक ऑपरेटर राज्य में माल पहुंचाने से कतरा रहे हैं। इस वजह से ज़रूरी सामानों की किल्लत होने लगी है, और रिटेल बाज़ारों में महंगाई का बोलबाला हो गया है।
माल ढुलाई की लागत आसमान पर
यहां की ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री भारी संकट से गुजर रही है। पहले जो गुवाहाटी से इम्फाल का एक राउंड ट्रिप 3 से 4 दिनों में पूरा हो जाता था, वही अब 25 से 30 दिनों तक खिंच रहा है। इस देरी का सीधा असर माल ढुलाई की लागत पर पड़ा है।
- ज़रूरी सामान: पहले जहां ₹5.60 प्रति किलो के हिसाब से माल ढुलाई होती थी, वहीं अब यह बढ़कर ₹8.50 प्रति किलो तक पहुंच गई है।
- सीमेंट और स्टील: भारी कंस्ट्रक्शन मटेरियल (Construction Material) जैसे सीमेंट और स्टील के लिए प्रति टन ₹1,350 के मुकाबले अब करीब ₹2,000 किराया देना पड़ रहा है।
आम आदमी पर महंगाई की मार
बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। प्याज, आलू, खाने के तेल से लेकर कंस्ट्रक्शन मटेरियल तक, हर चीज़ की कीमतें आसमान छू रही हैं। कुछ जगहों पर तो ज़रूरी सामानों के दाम इतने बढ़ गए हैं कि लोगों को खरीदना मुश्किल हो रहा है। कंपनियों के लिए भी यह एक बड़ा खतरा है, क्योंकि वे न तो समय पर स्टॉक मंगा पा रहे हैं और न ही बढ़ी हुई लागत से निपटने के लिए मुनाफा (Profit) बचा पा रहे हैं।
सड़कों की हालत और सुरक्षा का मुद्दा
नेशनल हाइवे 2 पर दिक्कतें होने की वजह से लोगों को NH-37 (इम्फाल-जिरिबाम) का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। लेकिन NH-37 पर चल रहे कंस्ट्रक्शन (Construction) के काम के कारण बड़े ट्रकों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।
इसके अलावा, कमर्शियल वाहनों (Commercial Vehicles) को सुरक्षा काफिले (Security Convoy) के साथ ही चलना पड़ता है, जो सिर्फ तय समय पर ही निकलते हैं और रविवार को तो बिल्कुल नहीं। इस वजह से हज़ारों ट्रक बॉर्डर पर फंस जाते हैं, जिससे खास तौर पर खराब होने वाले सामान का 60% से 70% तक नुकसान हो रहा है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
मानसून (Monsoon) का मौसम भी सिर पर है, जिससे NH-37 पर लैंडस्लाइड (Landslide) का खतरा बढ़ सकता है और सामान की किल्लत और भी बढ़ सकती है। मणिपुर में बिजनेस करने वाली कंपनियों के निवेशकों को सप्लाई चेन की मज़बूती, लागत का मैनेजमेंट और सुरक्षा प्रोटोकॉल (Security Protocol) पर पैनी नज़र रखनी होगी।
