Malaysia Airlines अपने भारतीय फ्लाइट नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रही है, लेकिन सामने बड़ी चुनौती फ्यूल की बढ़ती कीमतें हैं। कंपनी के कुल खर्च का **55%** हिस्सा केवल फ्यूल पर जा रहा है। इसे मैनेज करने के लिए एयरलाइन ने टिकट के दाम **20-30%** बढ़ा दिए हैं और अपनी क्षमता में **5%** की कटौती की है। फिलहाल एयरलाइन हर हफ्ते **80** उड़ानें संचालित कर रही है और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए IndiGo जैसे पार्टनर्स पर निर्भर है।
भारत पर फोकस और चुनौतियां
Malaysia Airlines भारतीय मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। साल 2026 की पहली छमाही में कंपनी के ट्रैफिक में 13% का उछाल दर्ज किया गया है। भारत कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ प्लान का अहम हिस्सा है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में फ्यूल की बढ़ती कीमतों ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
फ्यूल खर्च का बढ़ता बोझ
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण ऑपरेशनल कॉस्ट में भारी इजाफा हुआ है। पहले फ्यूल खर्च कंपनी के कुल खर्च का लगभग 40% होता था, जो अब 2026 में बढ़कर 55-56% तक पहुंच गया है। इस वित्तीय दबाव को कम करने के लिए एयरलाइन ने अपने फ्यूल खर्च का 36% हिस्सा पहले ही हेज (hedge) कर लिया है ताकि कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कम हो सके।
स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का सहारा
भारत के साथ मौजूद द्विपक्षीय (bilateral) समझौतों के तहत फ्लाइट स्लॉट की सीमा तय है, जिसके कारण कंपनी चाहकर भी अपनी डायरेक्ट फ्लाइट्स की संख्या नहीं बढ़ा पा रही है। इस समस्या से निपटने के लिए Malaysia Airlines ने IndiGo के साथ कोडशेयर एग्रीमेंट किया है। इसके जरिए कंपनी उन भारतीय शहरों तक भी अपनी पहुंच बना रही है जहां उनके पास सीधी उड़ान भरने के अधिकार नहीं हैं।
आने वाले समय में निवेशकों और एविएशन सेक्टर के जानकारों की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या सरकार के साथ फ्लाइट स्लॉट बढ़ाने को लेकर कोई नया समझौता होता है और ग्लोबल स्तर पर फ्यूल की कीमतें किस ओर रुख करती हैं।
