लिस्टिंग की राह में 'शॉर्ट-सेलर' का रोड़ा?
MakeMyTrip की भारतीय बिजनेस को डोमेस्टिक स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराने की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर एक एक्टिविस्ट शॉर्ट-सेलर, Morpheus Research, की रिपोर्ट के बाद संकट के बादल मंडराने लगे हैं। 30 मार्च को जारी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंपनी प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के अक्टूबर 2022 के आदेश का पालन नहीं कर रही है, जिसके लिए कंपनी पर $26 मिलियन का जुर्माना भी लगाया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि MakeMyTrip अभी भी 'एंटी-कंपिटिटिव प्रैक्टिसेज' (अनुचित प्रतिस्पर्धा) जारी रखे हुए है।
पुराने आरोप, नईThematisation
Morpheus Research के अनुसार, MakeMyTrip होटलों से सीधे तौर पर 'प्राइस कॉम्पिटिटिवनेस स्कोर' जैसे अप्रत्यक्ष तरीकों से समान कीमतें वसूलने के लिए कह रही है, यही चिंता CCI ने पहले भी जताई थी। इसके अलावा, रिपोर्ट में अकाउंटिंग में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि कंपनी ने दिवालिया हो चुकी GoAir एयरलाइन से बकाया रकम के लिए पर्याप्त फंड अलग नहीं रखा है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि MakeMyTrip ऐसे एडजस्टेड फाइनेंशियल फिगर्स का इस्तेमाल कर रही है जो अंतरराष्ट्रीय अकाउंटिंग स्टैंडर्ड से काफी अलग हैं, जिससे मुनाफा असलियत से ज्यादा दिख सकता है। 30 मार्च को MMYT के शेयर $36.33 पर बंद हुए, जो कि 1.93% की मामूली बढ़त थी, यह दर्शाता है कि इन नए आरोपों का असर अभी बाजार पर पूरी तरह से नहीं दिखा है।
हाई वैल्यूएशन बनाम बढ़ते जोखिम
MakeMyTrip का वैल्यूएशन (Valuation) मौजूदा समय में ग्लोबल कंपनियों के मुकाबले काफी ज्यादा है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 72.59x से 81.18x के बीच है, जो Expedia Group के 21.88x और Booking Holdings के 24.39x की तुलना में बहुत अधिक है। हालांकि, ज्यादातर एनालिस्ट MMYT को 'स्ट्रॉन्ग बाय' रेटिंग दे रहे हैं और इसका एवरेज टारगेट प्राइस $106.33 है, लेकिन यह उम्मीदें बढ़ते रेगुलेटरी जोखिमों को पूरी तरह से नहीं दर्शाती हैं। दूसरी ओर, भारतीय ऑनलाइन ट्रैवल मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है, जिसके 2026 तक $25.38 बिलियन तक पहुंचने और 2031 तक 8.74% की सालाना दर से बढ़ने का अनुमान है। स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल और मिडिल क्लास की बढ़ती आय इस ग्रोथ के पीछे मुख्य कारण हैं। MakeMyTrip का इस बाजार में 50% का दबदबा है।
लिस्टिंग की राह में क्या हैं बाधाएं?
बाजार की ग्रोथ और एनालिस्ट्स की राय के बावजूद, MakeMyTrip के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। मुख्य आरोप यह है कि कंपनी CCI के 2022 के आदेश का पालन नहीं कर रही है, जिसमें समान होटल प्राइसिंग और अन्य एंटी-कंपिटिटिव प्रैक्टिसेज को बंद करने को कहा गया था। Morpheus Research का दावा है कि कंपनी अभी भी इन तरीकों का अप्रत्यक्ष रूप से इस्तेमाल कर रही है और CCI की एक नई जांच भी चल रही है, जिसके नतीजे इसी साल आने की उम्मीद है। शॉर्ट-सेलर ने GoAir के बकाया के लिए फंड अलग न रखने जैसी संभावित अकाउंटिंग गड़बड़ियों का भी जिक्र किया है। इन आरोपों के साथ-साथ ग्राहकों को गुमराह करने के लिए 'डार्क पैटर्न्स' का इस्तेमाल करने के दावों से कंपनी की वित्तीय और ऑपरेशनल इंटीग्रिटी पर सवाल उठता है। भारतीय बाजार में लिस्टिंग का मकसद लोकल कैपिटल जुटाना और ग्रोथ को तेज करना था, लेकिन ये आरोप बड़े रेगुलेटरी बाधाएं खड़ी कर सकते हैं या निवेशकों की दिलचस्पी कम कर सकते हैं।
उम्मीदों पर अनिश्चितता का साया
एनालिस्ट्स अभी भी 'स्ट्रॉन्ग बाय' रेटिंग और ऊंचे टारगेट प्राइस के साथ सकारात्मक बने हुए हैं। कंपनी ने RedBus India के विलय और Flamingo Transworld के अधिग्रहण जैसे कदम उठाकर अपनी मार्केट पोजिशन मजबूत करने की कोशिश की है। हालांकि, रेगुलेटरी नियमों का पालन न करने और अकाउंटिंग के मुद्दों को लेकर लगे आरोप एक बड़ी अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं। MakeMyTrip की इंडिया लिस्टिंग की रणनीति और मार्केट में लीडरशिप, इन गंभीर आरोपों का सामना करने और नियामकों व निवेशकों को संतुष्ट करने की कंपनी की क्षमता पर निर्भर करेगी।