महाराष्ट्र सरकार ने मैरीटाइम सेक्टर के लिए नई पॉलिसी का ऐलान किया है। इसमें सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम और Mazagon Dock Shipbuilders के साथ **₹26,500 करोड़** का बड़ा समझौता शामिल है, जिसका मकसद कोंकण क्षेत्र में पोर्ट्स और शिपबिल्डिंग को रफ्तार देना है।
बड़े बदलाव की तैयारी
महाराष्ट्र सरकार मैरीटाइम सेक्टर को बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है। पोर्ट्स और शिपबिल्डिंग में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने नई पॉलिसी पेश की है। इसके तहत अब निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि एक सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम से सभी जरूरी मंजूरी मिल जाएगी। इसका मकसद ब्यूरोक्रेसी को कम करना और देश के अन्य तटीय राज्यों के मुकाबले महाराष्ट्र को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना है।
Mazagon Dock के साथ मेगा एग्रीमेंट
इस पॉलिसी के तहत राज्य सरकार ने केंद्र सरकार और Mazagon Dock Shipbuilders के साथ एक बड़ा त्रिपक्षीय समझौता किया है। ₹26,500 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से एक विशाल शिपयार्ड बनाया जाएगा, जिससे न केवल घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बुनियादी ढांचे के लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी।
पोर्ट्स के मैनेजमेंट में बदलाव
सरकार अब अपने पोर्ट्स चलाने का तरीका भी बदल रही है। कोंकण बेल्ट के पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में चार नए पोर्ट्स का विकास और संचालन अब राज्य सरकार खुद करेगी। यह प्राइवेट लीजिंग मॉडल से एक बड़ा बदलाव है, जिससे सरकार सीधा नॉन-टैक्स रेवेन्यू हासिल करना चाहती है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
राज्य का 'Viksit Maharashtra 2047' विजन तेजी से आगे बढ़ रहा है। Vadhvan Port, जिसमें महाराष्ट्र सरकार की 26% हिस्सेदारी है, पर तेजी से काम चल रहा है और इसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि, इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में एनवायरनमेंटल क्लियरेंस और सरकारी मैनेजमेंट की जिम्मेदारी जैसी चुनौतियां भी बरकरार हैं, जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
