महाराष्ट्र सरकार ने बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर्स के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। कंपनियों को जुलाई 2027 तक अपना पूरा फ्लीट इलेक्ट्रिक (EV) करना होगा, जिसके लिए उन्हें केवल **9 महीने** की विंडो दी गई है।
महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने राज्य में बाइक-टैक्सी सेक्टर के लिए नया नियम 'Maharashtra Bike-Taxi Rules, 2025' जारी कर दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि उन्हें पेट्रोल से चलने वाले टू-व्हीलर्स को पूरी तरह से हटाना होगा। इस ट्रांजिशन के लिए कंपनियों को 6 महीने की शुरुआती डेडलाइन दी गई है, जिसे विशेष परिस्थितियों में 3 महीने तक और बढ़ाया जा सकता है।
सरकार ने ठुकराई मांग
सरकार का रुख काफी सख्त है। कैबिनेट ने इंडस्ट्री की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें 2030 तक का समय या 50:50 के रेशियो में पेट्रोल-इलेक्ट्रिक हाइब्रिड फ्लीट रखने की छूट मांगी गई थी। अब Ola, Uber और Rapido जैसी दिग्गज कंपनियों को अपने कैपिटल कमिटमेंट्स और फ्लीट मैनेजमेंट को तेजी से बदलना होगा।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
यह बदलाव कंपनियों और ड्राइवर-पार्टनर्स दोनों के लिए भारी पड़ सकता है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की खरीद लागत पेट्रोल मॉडल के मुकाबले काफी ज्यादा है। यदि कंपनियां इस खर्च को खुद उठाती हैं, तो उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर बुरा असर पड़ सकता है। वहीं, अगर इसका बोझ ड्राइवरों पर डाला गया, तो फ्लीट की संख्या कम होने का खतरा है। साथ ही, कमर्शियल EV लोन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी एक बड़ा जोखिम बनी हुई है।
डेडलाइन न मानने पर एक्शन
मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता इस पॉलिसी की कामयाबी तय करेगी। जो कंपनियां 9 महीने की इस तय अवधि के भीतर इलेक्ट्रिक फ्लीट में स्विच नहीं कर पाएंगी, उन्हें रेगुलेटरी एक्शन या अपने ऑपरेशन्स पर सस्पेंशन का सामना करना पड़ सकता है। अब बाजार की नजरें इस बात पर हैं कि कंपनियां इन कैपिटल खर्चों को कैसे मैनेज करती हैं और इसका उनके प्रॉफिट पर कितना गहरा असर पड़ता है।
