महाराष्ट्र का बड़ा फैसला: ATF पर VAT घटा, एयरलाइंस को मिली राहत!

TRANSPORTATION
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
महाराष्ट्र का बड़ा फैसला: ATF पर VAT घटा, एयरलाइंस को मिली राहत!
Overview

महाराष्ट्र सरकार ने एयरलाइंस को बड़ी राहत देते हुए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाले वैट (VAT) को **18%** से घटाकर **7%** कर दिया है। यह कटौती अगले **6 महीने** के लिए लागू होगी।

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फ्यूल की आसमान छूती कीमतों के बीच राहत

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग कॉस्ट में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। आमतौर पर एयरलाइन के बजट का 35-40% रहने वाला फ्यूल कॉस्ट अब बढ़कर 55-60% तक पहुंच गया है। इस मुश्किल दौर में महाराष्ट्र सरकार ने 15 मई, 2026 से अगले 6 महीनों के लिए ATF पर वैट (VAT) को 18% से घटाकर 7% करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इससे एयरलाइंस को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। फरवरी के आखिर में $99.40 प्रति बैरल के मुकाबले, 8 मई को समाप्त हुए हफ्ते में ग्लोबल जेट फ्यूल की कीमतें बढ़कर $162.89 प्रति बैरल हो गईं। इस टैक्स कटौती से मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे महाराष्ट्र के एयरपोर्ट पर फ्यूलिंग की लागत कम होने की उम्मीद है। InterGlobe Aviation (IndiGo) जैसी बड़ी एयरलाइन्स, जिसका P/E रेशियो लगभग 54.53 है, और SpiceJet, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1,900 करोड़ है, इस फैसले से सीधे तौर पर फायदा उठा सकती हैं।

अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग टैक्स दरें

हालांकि, महाराष्ट्र का यह कदम देश भर में ATF पर अलग-अलग टैक्स दरों की समस्या को भी उजागर करता है। दिल्ली में ATF पर 25% वैट लगता है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह दर लगभग 1% है। तमिलनाडु में वैट 29% है और पश्चिम बंगाल में यह 20% के आसपास है, जिसमें अतिरिक्त टैक्स भी शामिल हैं। इन विभिन्न दरों के कारण एयरलाइंस को उन जगहों पर फ्यूल भरने में कॉम्पिटिटिव दिक्कतें आती हैं, जहां टैक्स ज्यादा होता है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पहले ही महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से ATF वैट दरें कम करने की अपील की थी। एयरलाइन्स लंबे समय से ATF को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के दायरे में लाने की मांग कर रही हैं, जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा मिल सके और लागत सुव्यवस्थित हो सके। लेकिन GST काउंसिल ने अभी तक इस बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।

इंडस्ट्री की गहरी समस्याएं अभी भी बरकरार

इस टैक्स राहत के बावजूद, भारतीय एविएशन सेक्टर गंभीर अंदरूनी समस्याओं से जूझ रहा है। राज्य-स्तरीय वैट कटौती समस्या का सिर्फ अल्पकालिक समाधान है, न कि इंडस्ट्री की बुनियादी कमजोरियों का। सबसे बड़ी चुनौती ग्लोबल फ्यूल कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव है, जो वैश्विक संघर्षों और हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण होता है। चूंकि वैट ईंधन की कीमत का प्रतिशत होता है, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने पर टैक्स लागत भी अपने आप बढ़ जाती है। इस जोखिम का असर सेक्टर के खराब फाइनेंशियल आउटलुक में भी दिख रहा है। ICRA का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 में इंडस्ट्री को कुल ₹170-180 अरब का नेट लॉस हो सकता है, और उसने सेक्टर के आउटलुक को 'निगेटिव' कर दिया है। Air India ने फाइनेंशियल ईयर 26 के लिए ₹22,000 करोड़ से अधिक का घाटा दर्ज किया है और उड़ानें कम करना शुरू कर दिया है। SpiceJet के कमजोर फाइनेंशियल मेट्रिक्स, जैसे निगेटिव अर्निंग्स और धीमी बिक्री वृद्धि, इस मुश्किल स्थिति को और भी उजागर करते हैं।

भविष्य की राह फ्यूल कीमतों और भू-राजनीति पर निर्भर

सेक्टर की रिकवरी कई बातों पर निर्भर करती है। वैश्विक संघर्षों का कम होना और क्रूड ऑयल की कीमतों का स्थिर होना बहुत जरूरी है। एयरलाइन्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने और लागत को सुव्यवस्थित करने के लिए GST में ATF को शामिल करने जैसे व्यापक टैक्स सुधारों की भी आवश्यकता है। इन बदलावों के बिना, फ्यूल की कीमतों में लगातार झटके नुकसान को असहनीय बना सकते हैं। इससे और भी फ्लाइट कैंसिलेशन हो सकते हैं और जरूरी हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ सकती है। वर्तमान में राज्य-वार टैक्स दरों की असमानता एक और जटिलता जोड़ती है, जो एयरलाइन ऑपरेशंस और भविष्य के निवेश निर्णयों को प्रभावित कर सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.