महाराष्ट्र सरकार ने कल्याण-डोंबिवली को नवी मुंबई से जोड़ने वाली 18.4 किलोमीटर लंबी मुंबई मेट्रो लाइन 12A को हरी झंडी दे दी है। ₹13,856 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को MMRDA पूरा करेगा, जिसका लक्ष्य 42 महीनों में इसे तैयार करना है।
महाराष्ट्र कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमिटी ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस 18.4 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए घनी आबादी वाले कल्याण-डोंबिवली इलाके को नवी मुंबई के इंडस्ट्रियल हब से जोड़ा जाएगा। MMRDA इस प्रोजेक्ट के लिए स्पेशल प्लानिंग अथॉरिटी के तौर पर काम करेगी।
प्रोजेक्ट की खासियत
इस मेट्रो लाइन में कुल 12 एलिवेटेड स्टेशन होंगे, जो मौजूदा हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव कम करेंगे। इसके अलावा, प्लान में 6.93 किमी का फोर-लेन और 8.69 किमी का सिक्स-लेन फ्लाईओवर सिस्टम भी शामिल है। यह कनेक्टिविटी तलोजा जैसे इंडस्ट्रियल जोन तक सफर को आसान बनाएगी। कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए हर स्टेशन पर फीडर बस सेवा भी मुहैया कराई जाएगी।
फाइनेंशियल रणनीति और निवेशकों के लिए संकेत
प्रोजेक्ट की लागत निकालने के लिए सरकार ने कॉरिडोर के आसपास की सरकारी जमीन MMRDA को ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। लैंड मोनेटाइजेशन की यह रणनीति निर्माण लागत के बोझ को कम करने में मदद करेगी। निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है, खासकर उन EPC कंपनियों के लिए जो इंफ्रास्ट्रक्चर टेंडर पर नजर रखती हैं। इसके अलावा, मेट्रो विस्तार से आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट सेक्टर को भी बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
रिस्क और ध्यान रखने वाली बातें
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जमीन अधिग्रहण, ब्यूरोक्रेटिक अड़चनें और कच्चे माल की कीमतों में उछाल जैसे रिस्क हमेशा बने रहते हैं। ऐतिहासिक रूप से मेट्रो प्रोजेक्ट्स में देरी के कारण ठेकेदारों के कैश फ्लो पर असर पड़ता है। शेयरधारकों को टेंडर प्रक्रिया की गति और निर्माण की रफ्तार पर पैनी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं से कंपनियों की ऑर्डर बुक और रेवेन्यू विजिबिलिटी तय होगी।
