उत्तर प्रदेश: लॉजिस्टिक्स हब बनने की राह पर
उत्तर प्रदेश खुद को एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स पावरहाउस के रूप में तेजी से स्थापित कर रहा है। इसी कड़ी में राज्य के नेतृत्व और वैश्विक शिपिंग कंपनी AP Moller-Maersk के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 फरवरी 2026 को AP Moller-Maersk के मैनेजिंग डायरेक्टर रेने पील पेडरसन से मुलाकात की। इस बैठक में राज्य में कंपनी की निवेश की संभावनाओं को और गहरा करने के तरीकों पर विचार-विमर्श हुआ। यह बातचीत उत्तर प्रदेश के मजबूत आर्थिक विकास और एक बिजनेस-अनुकूल माहौल बनाने की राज्य की सक्रिय भूमिका के बीच हुई।
Maersk की भारत रणनीति
AP Moller-Maersk का भारत में लंबे समय से जुड़ाव रहा है, जो 30 वर्षों से अधिक पुराना है। कंपनी ने 1990 में यहां परिचालन शुरू किया था। Maersk इंडिया क्षेत्र के बिज़नेस डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अफेयर्स के हेड विवेक शर्मा ने बताया कि कंपनी उत्तर प्रदेश में 20 वर्षों से अधिक समय से निवेश कर रही है। शर्मा ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सरकारी सहयोग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए नई निवेश संभावनाओं को तलाशने की उत्सुकता जाहिर की, ताकि परिचालन का और विस्तार किया जा सके। यह Maersk की भारत के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसमें APM Terminals और Maersk Group के माध्यम से पूरे देश में पोर्ट्स, टर्मिनल्स और लैंडसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर में 5 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण निवेश की योजनाएं शामिल हैं।
निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश क्यों खास?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को भारत के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में से एक बताया। उन्होंने निवेशकों को एक सुरक्षित, स्थिर और पारदर्शी परिचालन ढांचा मुहैया कराने का आश्वासन दिया। राज्य के आकर्षण को निवेशक सहायता प्रणालियों से और बढ़ावा मिलता है, जिसमें सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम, समयबद्ध स्वीकृतियां, पॉलिसी इंसेंटिव्स और कानून-व्यवस्था पर मजबूत जोर शामिल है। इसके अलावा, UP के पास एक विस्तृत एक्सप्रेसवे नेटवर्क, आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर संपत्तियां हैं, जो इसे व्यवसायों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाती हैं। राज्य ने 'मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क पॉलिसी 2024' जैसी नीतियां भी पेश की हैं, जिसका लक्ष्य ₹1,000 करोड़ के न्यूनतम निवेश के साथ एक शीर्ष लॉजिस्टिक्स हब के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करना है।
भारत का लॉजिस्टिक्स का कायाकल्प और बजट का साथ
उत्तर प्रदेश में Maersk की चर्चाएं ऐसे समय में हुई हैं जब हाल ही में यूनियन बजट 2026-27 में ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए ₹5,98,520 करोड़ के बड़े आवंटन से इस क्षेत्र को काफी बढ़ावा मिला है। इस बजट के साथ, पीएम गतिशक्ति और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी जैसी पहलों का उद्देश्य भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है, जो ऐतिहासिक रूप से 13% से अधिक से घटकर हाल ही में 8% जीडीपी से नीचे आ गई है। डांगकुनी से सूरत तक प्रस्तावित नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और 20 नेशनल वॉटरवेज के नियोजित संचालन, दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए तैयार किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर पुश के प्रमुख उदाहरण हैं। उत्तर प्रदेश, ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के महत्वपूर्ण हिस्सों के गुजरने के साथ, इन राष्ट्रीय गलियारों से लाभ उठाने के लिए रणनीतिक रूप से स्थित है। राज्य 27 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर भी विकसित कर रहा है, जिससे इसकी लॉजिस्टिक्स क्षमताओं में और वृद्धि हो रही है।
वित्तीय स्थिति और भविष्य की उम्मीदें
एपी मोलर-माल्स्क, एक एकीकृत लॉजिस्टिक्स में वैश्विक लीडर के तौर पर, मजबूत वित्तीय समर्थन के साथ काम करती है। 2026 की शुरुआत तक, कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 235.59 बिलियन DKK (लगभग 36 अरब डॉलर) है, और ट्रेलिंग ट्वेल्व-मंथ पी/ई रेशियो लगभग 7.70 है। Maersk की वित्तीय सेहत और लगभग 7.62% डिविडेंड यील्ड, बड़े पैमाने पर निवेश करने की इसकी क्षमता का समर्थन करते हैं। भारत में कंपनी की ऐतिहासिक उपस्थिति और हालिया रणनीतिक चर्चाएं, तेजी से विकसित हो रहे व्यापार और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में अपनी भूमिका का विस्तार करने के लिए एक लॉन्ग-टर्म विजन का संकेत देती हैं, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में दिख रहे विकास पथ और नीतिगत समर्थन का लाभ उठाते हुए।