MIC Electronics Limited ने बाज़ार को चौंका दिया है। कंपनी को रेलवे के ईस्टर्न और नॉर्दर्न ज़ोन से ₹59 करोड़ से भी ज़्यादा के डायरेक्ट डोमेस्टिक ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डर्स में हावड़ा डिवीज़न से ₹4.45 करोड़ और फिरोजपुर डिवीज़न से ₹1.46 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट शामिल हैं, जो कोच इंडिकेशन बोर्ड, ट्रेन इंडिकेशन बोर्ड और पब्लिक एड्रेस सिस्टम से जुड़े हैं। इन नए सौदों के दम पर कंपनी की तीसरी तिमाही (Q3FY26) में नेट सेल्स में 668% का ज़बरदस्त उछाल देखा गया और यह ₹90.23 करोड़ पर पहुँच गई।
हालांकि, इस शानदार टॉपलाइन ग्रोथ के बीच कंपनी की 9 महीने की परफॉरमेंस (9MFY26) एक अलग तस्वीर पेश करती है। इस अवधि में नेट प्रॉफिट घटकर ₹5.71 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह ₹6.26 करोड़ था। यह तब हुआ जब नेट सेल्स 180% बढ़कर ₹139.80 करोड़ हो गई थी। यह दर्शाता है कि कंपनी बढ़ते रेवेन्यू को मुनाफे में बदलने में कामयाब नहीं हो पा रही है, जिससे मार्जिन पर दबाव या ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी की आशंका है।
बाज़ार की नज़रें कंपनी के वैल्यूएशन पर भी हैं। MIC Electronics का करेंट P/E रेश्यो लगभग 110x के आसपास चल रहा है, जो सेक्टर के बड़े और स्थापित प्लेयर्स जैसे Siemens India (P/E ~48x-75x) और RVNL (P/E ~57x-69x) की तुलना में काफी ज़्यादा है। Kalpataru Projects International जैसे डायवर्सिफाइड EPC प्लेयर का P/E तो लगभग 24.6x है। ऐसे में, शेयर का इतना महंगा होना और मुनाफे में गिरावट, निवेशकों के लिए चिंता का सबब है।
कंपनी मेडिकल इक्विपमेंट और EV चार्जर्स जैसे नए सेक्टर्स में भी विस्तार कर रही है, जो भविष्य के लिए अच्छी बात है। लेकिन, इस विस्तार के साथ-साथ कोर रेलवे बिज़नेस में मार्जिन को बेहतर बनाए रखना कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।